30 वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा मातालकुडूम गांव, न सड़क, न बिजली, न साफ पानी... भीषण गर्मी में ग्रामीणों का जीवन बदहाल

0
कांकेर/पखांजूर। सरकार भले ही गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत गोण्डाहुर का आश्रित गांव मातालकुडूम आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। करीब 30 वर्षों से बसे इस गांव में आज तक सड़क, बिजली और साफ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं, जिससे ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है।

भीषण गर्मी के बीच गांव में गहराया जल संकट ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। करीब 18 परिवारों वाले इस गांव में लगा एकमात्र हैंडपंप कई वर्षों से खराब पड़ा हुआ है। ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को इसकी जानकारी दी, लेकिन आज तक न तो हैंडपंप की मरम्मत कराई गई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

मजबूरी में ग्रामीण झरिया का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। यही पानी गांव के लोगों के लिए पीने, खाना बनाने, नहाने और कपड़े धोने का एकमात्र सहारा बना हुआ है। दूषित पानी के इस्तेमाल से गांव के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं कई बार बीमार भी पड़ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

गांव आज भी कई बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह वंचित है। मातालकुडूम में अब तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंची है, जिससे ग्रामीण अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। छोटे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, जिससे बच्चों के पोषण और शिक्षा पर भी असर पड़ रहा है।

गांव तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक संकरी पगडंडी है। बरसात के दिनों में यह रास्ता और भी ज्यादा कठिन हो जाता है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में नेता गांव पहुंचकर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की सुध लेने कोई नहीं आता। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।

करीब 30 वर्षों से बसे इस गांव में आज तक सड़क, बिजली, साफ पानी और बच्चों के लिए आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं, जिससे विकास के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब सवाल यह है कि सरकार और प्रशासन आखिर कब मातालकुडूम गांव के ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर समाधान करेगा, या फिर यह गांव यूं ही विकास की राह देखता रहेगा। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द हैंडपंप सुधारने, स्वच्छ पेयजल, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

Share this article

Show comments
Hide comments

0 Comments

Post a Comment