बस्तर की भूमि आदिवासियों का है, सनातनियों का नहीं। भीम आर्मी सदस्य विकेश सर्फे का गौरव चोपड़ा को पलटवार....
संविधान हमें बराबरी का अधिकार देता है
फिर भी कुछ मनुवादी विचारधारा के लोग लगातार ST, SC, OBC समुदायों के खिलाफ ज़हर फैला रहे हैं।
ये लोग आरक्षण को “भीख” कहते हैं, SC/ST एक्ट को खत्म करने की मांग करते हैं, और आदिवासी-दलितों को नीचा दिखाने वाली टिप्पणियाँ खुलेआम सोशल मीडिया पर करते हैं।
इसका प्रमाण हमारे पास है।
वही अब गौरव चोपड़ा नाम का व्यक्ति बोल रहे है कि बस्तर की भूमि सनातनियों का है, चोपड़ा जी को बता दूं आदिवासी हिंदू नहीं इस देश के मूलनिवासी है , और बस्तर का हर गांव 5वीं अनुसूचित क्षेत्र में आता है, 5वीं अनुसूचित क्षेत्र आदिवासी बहुल क्षेत्रों में लागू होता है मतलब बस्तर की भूमि आदिवासियों की है इसमें आदिवासियों का अधिकार है बाहरी व्यक्ति का नहीं, चोपड़ा जी आप एक वीडियो में बोलते है कुछ आदिवासी ईसाई धर्म को मानकर धर्मांतरण कर रहे है मै आपको पूछना चाहता हूं आदिवासी अगर हिंदू धर्म को माने तो वो धर्मांतरण नहीं है , अगर जब वही व्यक्ति ईसाई धर्म को माने तो वह धर्मांतरण है, चोपड़ा जी के द्वारा बोला जा रहा है कि धर्मांतरित आदिवासी भाई-बहनों के दफ़नाने बस्तर में नहीं देंगे तो मैं चोपड़ा जी को बता दूं जितना जीवित व्यक्ति की अधिकार होता है उतना ही मृत व्यक्ति का भी अधिकार होता है , खैर आप मनुस्मृति मानते है , संविधान नहीं मानते होंगे
जब संविधान नहीं था, तब मनुस्मृति के अनुसार ही समाज का निर्णय लेते है और उसी मनुवादी सोच ने दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को अछूत बनाकर रखा।
तब हमारे समाज को शिक्षा, मंदिर, पानी और समानता से दूर रखा गया।
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इसी अन्याय के खिलाफ मनुस्मृति जलाकर समानता और अधिकार की लड़ाई शुरू की थी।
मैं गौरव चोपड़ा जी से पूछना चाहता हूँ जब आपका समाज सदियों से “श्रेष्ठ” कहलाता रहा, तो आपने उस समय आदिवासियों और दलितों को बराबरी क्यों नहीं दी?
क्यों नहीं कहा कि “वे भी हमारे भाई हैं”?
क्यों उस दौर में आदिवासी और दलितों को शिक्षा से, मंदिर से, समाज से, मानवता से अलग कर दिया गया?
इतिहास गवाह है — भारत की पहली शिक्षित महिला सावित्रीबाई फुले जी को भी किसी ब्राह्मण या मनुवादी समाज ने नहीं, बल्कि एक ईसाई मिशनरी सिंथिया फर्रार नामक महिला ने सहयोग किया था।
क्योंकि उस दौर में ब्राह्मणवाद ने महिलाओं और निचली जातियों की शिक्षा तक रोक रखी थी।
अब जब संविधान ने अधिकार दिए हैं आज वही मनुवादी लोग संविधान पर प्रश्न उठा रहे हैं, आरक्षण और SC/ST एक्ट को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
अगर ये आरक्षण “भीख” है — तो बताइए, भीख देने वाला कौन है?
हमने तो शोषण का प्रतिकार और समानता का अधिकार मांगा है, जो हमें संविधान ने दिया है।
ST/SC एक्ट इसलिए बनाया गया, क्योंकि आज भी जातिगत भेदभाव, अपमान और हिंसा समाज में जारी है।
आदिवासी दलित के साथ हो रहे शोषण को रोकने के उद्देश्य से इस एक्ट को बनाया गया है फिर ये मनुवादी सोच वाले इसे हटाने की मांग क्यों कर रहे हैं?
क्योंकि ये कानून उनकी सोच पर लगाम लगाता है।
चोपड़ा जी आपको बता दूं बस्तर की भूमि आदिवासियों की है, सनातनियों की नहीं।
बस्तर सदियों से आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की भूमि रही है।
यहाँ के लोग प्रकृति, जंगल, नदी और धरती की पूजा करते हैं — ना कि मनुस्मृति की जो सनातनी कहलाए।
हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं।
हमें किसी धर्म की पहचान की ज़रूरत नहीं, क्योंकि आदिवासी इस देश के पहले नागरिक, असली मालिक और रक्षक हैं।
अगर हमारे बीच कोई समस्या आती है तो आदिवासी खुद सक्षम हैं उसे सुलझाने में।
किसी बाहरी व्यक्ति को हमारे निर्णयों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं।
विकेश सर्फे
भीम आर्मी – सदस्य जिला उत्तर बस्तर कांकेर (छ.ग.)
दिनांक: [07/11/2025]


0 Comments
Post a Comment