केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय से कांकेर तक: पद्मश्री डॉ. अजय कुमार मंडावी की कार्यशाला में प्रशिक्षण लेने पहुँचे तीन विद्यार्थी

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कांकेर। जिले के सुप्रसिद्ध काष्ठ कला (लकड़ी नक्काशी) कलाकार एवं समाजसेवी Ajay Kumar Mandavi द्वारा युवाओं को कौशल आधारित आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करने का अभियान निरंतर जारी है। वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित डॉ. मंडावी जी अपनी अद्वितीय लकड़ी नक्काशी एवं लेखन कला के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं।

समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाते हुए उन्होंने कांकेर केंद्रीय जेल में विचाराधीन बंदियों को काष्ठ कला का प्रशिक्षण देकर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की मिसाल प्रस्तुत की। अब तक वे 400 से अधिक युवाओं एवं नागरिकों को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भरता की राह दिखा चुके हैं।



इसी क्रम में देश के सीमित केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालयों में शामिल

Indira Gandhi National Tribal University, अमरकंटक (मध्यप्रदेश)

के तीन विद्यार्थी इंटर्नशिप एवं विशेष प्रशिक्षण के लिए कांकेर पहुँचे। पूरे देश में स्थापित मात्र पाँच जनजातीय विश्वविद्यालयों में से एक के विद्यार्थियों का कांकेर आकर पारंपरिक काष्ठ कला का प्रशिक्षण लेना जिले के लिए गौरव और सम्मान का विषय माना जा रहा है।


विशेष उल्लेखनीय है कि ये तीनों विद्यार्थी सात दिवसीय प्रशिक्षण हेतु कांकेर आए थे। डॉ. मंडावी जी द्वारा उन्हें पूर्णतः निःशुल्क काष्ठ कला प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया गया, बल्कि पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ उन्हें कला की बारीकियों से परिचित कराया गया। यह पहल उनके सामाजिक दायित्व और सेवा भाव को दर्शाती है।


प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में

*जैकी यादव – एम.एससी. (प्राणीशास्त्र), निवासी चकरभाठा, जिला मुंगेली (छत्तीसगढ़)*,

*दीपक राज उददे – बी.ए. (संस्कृत), निवासी बरछा, जिला डिंडोरी (मध्यप्रदेश)*,

*मंगलदेव कवासी – बी.ए. (भूगोल), ग्राम कलेपाल, विकासखंड लोहंडीगुड़ा, जिला बस्तर (छत्तीसगढ़)* शामिल हैं।


तीनों विद्यार्थियों ने अपनी शैक्षणिक पढ़ाई के साथ कला कौशल अर्जित करने की इच्छा से डॉ. मंडावी जी से निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें काष्ठ कला की सूक्ष्म तकनीकों, रचनात्मक दृष्टिकोण और कलात्मक अनुशासन की बारीकियाँ सिखाई गईं।


इसके अतिरिक्त, *नवंबर 2025 से डॉ. मंडावी जी भानुप्रतापपुर स्थित बीएसएफ कैंप में आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी काष्ठ शिल्प का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। यह पहल पुनर्वास और मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिससे कौशल के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर जीवन की ओर प्रेरित किया जा सके*।


विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें केवल एक नया हुनर ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास, सृजनात्मक सोच और भविष्य की स्पष्ट दिशा भी प्रदान की।


डॉ. मंडावी जी की यह पहल कौशल विकास को बढ़ावा देने, ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने जैसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों को साकार कर रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और कौशल का समन्वय ही वर्तमान समय में युवाओं की सफलता की कुंजी है। पद्मश्री डॉ. अजय कुमार मंडावी का यह सतत प्रयास न केवल बस्तर अंचल बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है।


संदेश स्पष्ट है — सही मार्गदर्शन, समर्पण और अवसर मिले तो ग्रामीण प्रतिभाएँ भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान स्थापित कर सकती हैं।

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