भर्ती मरीज की जांच में लापरवाही, 7 लैब टेक्नीशियन होने के बावजूद दो दिन तक नहीं लिया गया बलगम सैंपल दो कर्मचारियों को नोटिस

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*TOP NEWS छत्तीसगढ़ जिला उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामीण से संतोष बाजपेयी की रिपोर्ट*

*भानुप्रतापपुर*

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है, जहां भर्ती एक महिला मरीज का दो दिनों तक बलगम जांच के लिए सैंपल तक नहीं लिया गया। इस मामले को लेकर 29 मार्च को स्वदेश न्यूज़ में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है।

बताया जा रहा है कि दुर्गूकोंदल विकासखंड के ग्राम भेलवापानी निवासी 32 वर्षीय सुनीता पुडो को लगातार खांसी की शिकायत के चलते 26 मार्च को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। डॉ. शेखर सरदार ने जांच के बाद मरीज को भर्ती करते हुए बलगम सहित अन्य आवश्यक जांच लिखी थी, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि अस्पताल में 7 लैब टेक्नीशियन होने के बावजूद दो दिनों तक मरीज का सैंपल ही नहीं लिया गया।

आखिरकार 28 मार्च की सुबह सैंपल लिया गया, लेकिन परिजनों को बताया गया कि रिपोर्ट दो दिन बाद मिलेगी। जांच में इस देरी से मरीज के परिजन परेशान हो गए और उन्होंने इलाज को लेकर गंभीर चिंता जताई। हालात से निराश होकर परिजनों ने मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने का फैसला लिया।

एम्बुलेंस तक नहीं मिली, निजी वाहन से ले जाना पड़ा मरीज

परिजनों ने आरोप लगाया कि एम्बुलेंस की मांग करने के बावजूद सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके चलते उन्हें निजी वाहन किराए पर लेकर मरीज को डौंडी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

मरीज के पति नरेश पुडो ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गांव में लंबे समय तक इलाज कराने के बाद वे बेहतर सुविधा की उम्मीद में अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां भी लापरवाही का सामना करना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इमरजेंसी में भी 3-4 दिन में जांच नहीं हो पा रही है, तो मरीज को समय पर इलाज कैसे मिल पाएगा।

दो जिम्मेदारों को थमाया नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएमओ डॉ. शाचेन्द गोटा ने आईपीडी सिस्टर इंचार्ज रजनी गजविए और लैब इंचार्ज भुनेश्वरी नेगी को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। नोटिस में पूछा गया है कि आखिर दो दिनों तक मरीज का बलगम सैंपल क्यों नहीं लिया गया।

बीएमओ ने स्पष्ट किया है कि जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इस पूरे मामले को लेकर 1 अप्रैल को बैठक भी बुलाई गई है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां संसाधन होने के बावजूद मरीजों को समय पर जांच और इलाज नहीं मिल पा रहा है।

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