मां मावली मंदिर का प्राचीन इतिहास।

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गोवर्धन यदु तिल्दा नेवरा

तिल्दा नेवरा रायपुर राजधानी से 38कि.मी.की दुरी पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे एवं राष्ट्रीय मुख्य मार्ग के बीचों बीच बसा शहर तिल्दा नेवरा नगर पालिका परिषद क्षेत्र बालाजी वार्ड नंबर 19 पुरानी बस्ती तिल्दा में स्थित मां मावली मंदिर प्राचीन काल के समय से जाना पहचाना जाता है व इनकी प्राचीन इतिहास भी है। मां मावली माता की प्राचीन इतिहास में बताया गया है कि लगभग 200 वर्ष पुरानी है। जिनकी ख्याती दुर दुर तक फैली हुई है। जैसे की मां मावली मंदिर धमधागढ,मां मावली फिगेश्वर, मां मावली सिंगापुर भाटापारा , मां मावली बलौदाबाजार, मां मावली मंदिर पुरानी बस्ती तिल्दा, में स्थित है। इस मंदिर की ख्याति के सम्बंध में कई प्रकार की धार्मिक धारणाएं हैं कि किंदंवतियों के अनुसार मां मावली माता की मंदिर कब और किसने बनवाया इसका कोई ठोस प्रमाण आज तक नहीं मिला है।जन श्रुति यह बताते है कि किसी जमाने में कल्चुरी राजा का राज चलता था जिसके चलते यहां पर कुछ व्यापारी व्यापार करने के लिए इसी मार्ग से रतनपुर जाते थे।जो कि यह छत्तीसगढ़ का पुराना राजधानी था यह स्थान एक धनघोर जंगल था और रात्रि हो जाने के कारण इसी जगह पर व्यापारी लोग आराम करने के लिए यह स्थान पर रूकते थे । इसी चर्चा है कि मां मावली मंदिर के पास ही एक बौली व जलाशय ,तालाब था इस वजह से व्यापारी लोग महिनों तक पड़ाव डाल कर रूकते थे लेकिन ऐसी चर्चा है कि मां मावली का मंदिर एवं उसके समीप बौली एवं जलाशय बहुत ही सुन्दर एवं मनोरम था। वहीं पर एक खंडहरनुमा छोटी सी कुटिया थी उसी कुटिया में मां मावली की एक मूर्ति स्थापित था ।समय के साथ शैने शैने धीरे धीरे बदलाव आते गये और यहां पर प्राचीन काल में गोंड राजाओं गोंडवाना का गढ़ था और गोंड राजाओं का आधिपत्य धीरे धीरे समाप्त हो कर मराठा शासक के आधिपत्य में आ जाने के पश्चात ब्रिटिश शासन करने लगे लगभग 100 वर्ष गुजर जाने के बाद यहां पर सर्व प्रथम स्व.हरिराम ठेठवार यदु बैगा जो कि अपने परिवार के साथ आकर मानव सेवा,गौ सेवा, जड़ी बूटी से नाड़ी रोग से करने लगे। एक दिन गाय को चराते चराते वह उस घनघोर जंगल में चले गये और उसी जगह पर जहां नीम, इमली के वृक्ष के नीचे बैठ गया और उसे नींद आ गई गायें घने जंगल में चले गए जो कि घास फुस से ढका हुआ था। अचानक जब बैगा का नींद खुली तो देखा कि गायें वहां पर नहीं दिखाई दिये तो इधर उधर नजरें लगाकर देखा और जंगल के आस पास तलाश करते लगभग एक सप्ताह बीत गया गायें नहीं मिला तो वहीं मां मावली माता की मूर्ति दिखाई दिये तो उसने माता के सामने सच्चे मन से श्रद्धापूर्वक स्मरण कर प्रार्थना किया कि मां मावली माता मेरी गायें मिल जाए तो मैं घी का जोत जलाऊंगा । घर गए तो देखा कि सभी गायें घर वापस आ गए थे। इस बात कि जानकारी गांव के माल गुजार राय बहादुर जो मनोहर राव के दादा साहब थे।ऐ

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