गलत मेडिकल रिपोर्ट के कारण नाबालिग और परिवार को झेलनी पड़ी मानसिक पीड़ा, जांच में गर्भावस्था की बात निकली गलत
राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले के सोमनी थाना क्षेत्र में एक 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची से जुड़ा मामला सामने आया है, जिसमें कथित रूप से गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बच्ची और उसके परिवार को गंभीर मानसिक एवं सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाद में जिला अस्पताल में कराई गई पुनः जांच और सोनोग्राफी में गर्भवती होने की बात गलत साबित हुई, जिसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमनी क्षेत्र के एक गांव की 14 वर्षीय बच्ची स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते 25 मई को अपने माता-पिता के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोमनी पहुंची थी। वहां की गई प्रारंभिक जांच के दौरान बच्ची के गर्भवती होने की आशंका व्यक्त की गई। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों और पुलिस को सूचना दी गई।
परिजनों का आरोप है कि मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस द्वारा मामले में पूछताछ शुरू की गई। परिवार का कहना है कि बच्ची और उसके परिजनों से लगातार पूछताछ की गई, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हो गए। इस दौरान गांव में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं शुरू हो गईं, जिससे परिवार को सामाजिक असहजता और तनाव का सामना करना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने 26 मई को बच्ची की जिला अस्पताल में दोबारा चिकित्सकीय जांच एवं सोनोग्राफी कराई। जिला अस्पताल की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बच्ची गर्भवती नहीं है। नई रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।
घटना से आहत परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि गलत मेडिकल रिपोर्ट के कारण बच्ची और परिवार को अनावश्यक मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक पीड़ा झेलनी पड़ी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर संबंधित थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया है तथा पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित मेडिकल अधिकारी को तत्काल प्रभाव से वहां से हटाकर जिला अस्पताल में अटैच कर दिया है। विभागीय स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारों के अनुसार नाबालिगों से संबंधित मामलों में पूछताछ और कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया तथा बाल संरक्षण संबंधी प्रावधानों के अनुरूप की जानी चाहिए। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी गंभीर विषय माना जाता है।
इस मामले पर छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। आयोग ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। क्षेत्र में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है और स्थानीय लोग निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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