महतारी वंदन योजना और शराब राजस्व को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, कलेक्टर के कथित बयान पर गरमाई राजनीतिअंबिकापुर/रायपुर

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अंबिकापुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित महतारी वंदन योजना को लेकर प्रदेश में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सरगुजा जिले के अंबिकापुर में शराब दुकान बंद कराने की मांग को लेकर पहुंचीं महिलाओं और प्रशासन के बीच हुई बातचीत के दौरान सरगुजा कलेक्टर के एक कथित बयान ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। इस बयान के सामने आने के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

जानकारी के अनुसार अंबिकापुर क्षेत्र की कई महिलाएं अपने इलाके में संचालित शराब दुकान को बंद कराने की मांग लेकर प्रशासन के पास पहुंची थीं। महिलाओं का कहना था कि शराब की बिक्री से परिवारों में कलह बढ़ रही है, घरेलू हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं तथा युवाओं पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। महिलाओं ने प्रशासन से शराब दुकान हटाने या बंद कराने की मांग की।

इसी दौरान सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के एक कथित बयान को लेकर विवाद शुरू हो गया। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा फैल गई कि कलेक्टर ने कहा है कि यदि शराब दुकानें बंद हो जाएंगी तो महतारी वंदन योजना के लिए पैसा कहां से आएगा। हालांकि इस बयान को लेकर आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।

महतारी वंदन योजना प्रदेश सरकार की प्रमुख महिला हितैषी योजनाओं में शामिल है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। लाखों महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही हैं। ऐसे में योजना के वित्तीय स्रोतों को शराब राजस्व से जोड़कर देखे जाने की चर्चा ने सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं।

महिलाओं का कहना है कि सरकार एक ओर महिलाओं के कल्याण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर कई क्षेत्रों में शराब दुकानों को लेकर लोगों की नाराजगी सामने आती रही है। इसी कारण यह मुद्दा आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस पूरे मामले को महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का प्रचार तो कर रही है, लेकिन शराब बिक्री से होने वाले राजस्व पर निर्भरता भी बढ़ रही है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश के कई इलाकों में शराबबंदी की मांग लगातार उठती रही है। विपक्ष का आरोप है कि महिलाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक और जनस्तर पर आगे भी उठाएगी।

विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार और बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस को शराब नीति पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल की नीतियों पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कथित शराब घोटाले और शराब वितरण व्यवस्था को लेकर विपक्ष पर पलटवार किया।

बीजेपी का कहना है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है और इसके लिए राज्य सरकार विभिन्न राजस्व स्रोतों का उपयोग करती है। सरकार का दावा है कि योजना को केवल शराब बिक्री से जोड़ना भ्रामक और तथ्यहीन है।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में शराबबंदी का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और महिला समूहों द्वारा समय-समय पर शराब दुकानों के विरोध में आंदोलन किए जाते रहे हैं। दूसरी ओर सरकारें राजस्व और सामाजिक हितों के बीच संतुलन बनाने की बात करती रही हैं।

अंबिकापुर की इस घटना ने एक बार फिर शराबबंदी, महिलाओं की सुरक्षा, पारिवारिक वातावरण और सरकारी योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

राजनीतिक बयानबाजी से इतर आम लोगों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था किन स्रोतों से होती है और सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए शराब नीति कैसी होनी चाहिए। महिलाओं के एक वर्ग का कहना है कि परिवार और समाज पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए शराब दुकानों के संबंध में संवेदनशील निर्णय लिए जाने चाहिए।

फिलहाल महतारी वंदन योजना को लेकर शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक गलियारों से निकलकर जनचर्चा का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार, विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं प्रदेश की राजनीति को और गर्मा सकती हैं। वहीं सभी की निगाहें इस बात पर भी टिकी हैं कि प्रशासन इस विवाद पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है और शराब दुकान को लेकर महिलाओं की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।

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