जैतपुरी में वन विभाग की कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद, आदिवासी ग्रामीणों ने लगाए मारपीट के आरोप, DFO को हटाने की उठी मांग
धमतरी/सिहावा धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र अंतर्गत जैतपुरी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कथित अतिक्रमण और अवैध पेड़ कटाई को लेकर वन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के बाद आदिवासी ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों के साथ मारपीट एवं दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। वहीं ग्रामीणों ने डिप्टी डायरेक्टर (DFO) को हटाने की मांग भी उठाई है।
घटना रविवार की बताई जा रही है, जबकि सोमवार को बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण धमतरी कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग की कार्रवाई एकतरफा थी और बिना पर्याप्त जांच के ग्रामीणों के खिलाफ कठोर कदम उठाए गए।
वन विभाग के अनुसार जैतपुरी क्षेत्र में करीब 261.82 एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। विभाग का दावा है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है। अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में वर्ष 2011 और 2015 में प्राथमिक अपराध रिपोर्ट (पीओआर) दर्ज की गई थी। विभाग का कहना है कि कुछ आरोपियों द्वारा अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी किया गया था, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था।
रविवार को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन वन विभाग की टीम के साथ जैतपुरी गांव पहुंचे थे। विभाग का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोग जंगल क्षेत्र में पेड़ काटते दिखाई दिए, जिन्हें रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन वे गांव की ओर चले गए। इसके बाद वन विभाग की टीम गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।
वन विभाग का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की और सरकारी कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया। विभाग के अनुसार दो महिला वनकर्मी घायल हुईं, जबकि कई अन्य कर्मचारियों को मामूली चोटें आईं। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि सरकारी वाहनों की चाबियां छीनी गईं और कर्मचारियों की वर्दियां फाड़ दी गईं।
हालांकि ग्रामीणों ने वन विभाग के इन आरोपों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी टाइगर रिजर्व की भूमि पर कब्जा नहीं किए हैं, बल्कि अपने पूर्वजों से मिली जमीन पर वर्षों से खेती कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में किसी प्रकार की अवैध पेड़ कटाई नहीं हुई है और जितने पेड़ पहले थे, उतने ही आज भी मौजूद हैं।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हुई थी, तो वन विभाग को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि "यदि पेड़ एक सप्ताह या एक वर्ष में कटे हैं, तो इतने वर्षों तक विभाग क्या कर रहा था।"
गांव की महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वन विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे और उनके पतियों को जबरन पकड़कर वाहन में बैठा लिया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई। कुछ महिलाओं का कहना है कि बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया और वीडियो बना रहे युवाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज के लोगों के साथ अन्याय और अत्याचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि बिना ग्रामवासियों की बात सुने वन विभाग ने दबावपूर्ण कार्रवाई की। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि उनकी आजीविका पूरी तरह खेती और जंगल पर निर्भर है तथा वे वर्षों से उसी जमीन पर रहकर जीवनयापन कर रहे हैं।
सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी समाज के लोग धमतरी कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, ग्रामीणों के साथ कथित मारपीट करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा DFO को हटाने की मांग की।
इस संबंध में धमतरी पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन और पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय सामाजिक संगठनों और आदिवासी समाज के लोगों ने मांग की है कि मामले में दोनों पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और क्षेत्र में शांति कायम रह सके।

0 Comments
Post a Comment