ईरागांव में विशेष ग्रामसभा का आयोजन, सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय

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भानुप्रतापपुर। भानुप्रतापपुर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम ईरागांव में विशेष ग्रामसभा की बैठक आयोजित कर गांव की सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक मान्यताओं एवं सामाजिक एकजुटता से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में ग्रामीणों ने आदिवासी परंपरा, रीति-रिवाज, देवी-देवताओं में आस्था तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त की।

ग्रामीणों का कहना था कि बाहरी लोगों द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रलोभन और लालच देकर भोले-भाले ग्रामीणों एवं आदिवासी समुदाय के लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इस प्रकार की गतिविधियों से पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था और सामुदायिक एकता प्रभावित हो सकती है।

इसी विषय को लेकर आयोजित विशेष ग्रामसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर गांव की सांस्कृतिक एवं पारंपरिक व्यवस्था की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्णय लिया गया। ग्रामसभा के निर्णय के पश्चात गांव के प्रमुख स्थान पर एक सूचना बोर्ड भी लगाया गया है, जिसमें बाहरी धर्म प्रचारकों के संबंध में ग्रामसभा के निर्णय का उल्लेख किया गया है।

ग्रामीणों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म विशेष का विरोध करना नहीं है, बल्कि अपनी पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना है। ग्रामसभा का मानना है कि गांव की परंपराओं और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखना सभी ग्रामीणों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य देवेन्द्र टेकाम ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी समृद्ध परंपराओं, संस्कृति, रीति-रिवाजों और देवी-देवताओं में आस्था के कारण विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रों में धर्मांतरण की गतिविधियों के कारण सामाजिक समरसता प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और पूर्वजों की विरासत से जुड़े रहकर सामाजिक एकता एवं भाईचारे को मजबूत बनाए रखना चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए जागरूक एवं संगठित रहने का आह्वान किया।

विशेष ग्रामसभा बैठक में ग्राम पटेल प्रयाग सिंह कोरेटी, जिला पंचायत सदस्य देवेन्द्र टेकाम, भागवत कोरेटी, मयाराम आंचला, पुखराज आंचला, गैंद सिंह हिडको, ज्वाला प्रसाद जैन, चैतू आंचला, बालसिंह कोरेटी, गौतम उसेंडी, हिरालाल हिडको, राधेश्याम केमरो, माहरू गावड़े, निर्मल गावड़े, पुनीत केमरो, जगदीश कोरेटी, रामबाबू कावड़े, मनाराम कोरेटी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामसभा का यह निर्णय गांव की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक मान्यताओं और सामाजिक एकजुटता को बनाए रखने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। निर्णय के बाद क्षेत्र में इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा का माहौल बना हुआ है।

विशेष ग्राम सभा बैठक में संबोधित करते हुए जिला पंचायत सदस्य देवेन्द्र टेकाम ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाजों एवं देवी-देवताओं में अटूट आस्था के कारण एक विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसे सुरक्षित रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। टेकाम ने चिंता जताते हुए कहा कि धर्मांतरण जैसी गतिविधियों से पारंपरिक सामाजिक ताना-बाना और सांस्कृतिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी परंपराओं, संस्कृति और पूर्वजों की धरोहर के संरक्षण के लिए जागरूक एवं संगठित रहने का आह्वान करते हुए सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को मजबूत बनाए रखने की अपील की।

विशेष ग्रामसभा बैठक में ग्राम पटेल प्रयाग सिंह कोरेटी, जिला पंचायत सदस्य देवेन्द्र टेकाम, भागवत कोरेटी, मयाराम आंचला, पुखराज आंचला, गैंद सिंह हिडको, ज्वाला प्रसाद जैन, चैतू आंचला, बालसिंह कोरेटी, गौतम उसेंडी, हिरालाल हिडको, राधेश्याम केमरो, माहरू गावड़े, निर्मल गावड़े, पुनीत केमरो, जगदीश कोरेटी, रामबाबू कावड़े, मनाराम कोरेटी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामसभा का यह निर्णय गांव की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक मान्यताओं और सामाजिक एकजुटता को बनाए रखने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। निर्णय के बाद क्षेत्र में इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा का माहौल बना हुआ है।

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