पत्रकार सम्मान समारोह एवं परिचर्चा आयोजित।
गोवर्धन यदु
तिल्दा-नेवरा, 4 जून। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा द्वारा पत्रकार सम्मान समारोह एवं “वैश्विक शांति की आवश्यकता : मीडिया की भूमिका” विषय पर विशेष परिचर्चा का आयोजन अत्यंत गरिमामय एवं आध्यात्मिक वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय पत्रकार, मीडिया प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में रायपुर से पधारे वरिष्ठ पत्रकार मधुकर द्विवेदी उपस्थित रहे, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 50 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। उनके साथ वरिष्ठ पत्रकार प्रियंका कौशल एवं विशाल भाई भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्हें मीडिया जगत में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। कार्यक्रम में तिल्दा प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोती ज्ञानचंदानी, संरक्षक गौरीशंकर सैनी, छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र रथ गौरव सहित अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। नन्हीं बालिकाओं खुशी एवं श्याम्भवी ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया, वहीं अंजू बहन एवं बिंदु बहन ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
अपने उद्बोधन में वरिष्ठ पत्रकार मधुकर द्विवेदी ने कहा कि पत्रकारिता के आदिपुरुष नारद मुनि माने जाते हैं, जिनकी पत्रकारिता लोककल्याणकारी थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार प्रसारित करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त उपकरण है। पत्रकारों की सबसे बड़ी पूंजी उनकी विश्वसनीयता है और इसी आधार पर जनता मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानती है। उन्होंने कस्बाई पत्रकारिता को भारतीय पत्रकारिता की आत्मा बताते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में भी निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता करना अत्यंत सराहनीय कार्य है।
ब्रह्माकुमारीज़ के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से संस्था के संपर्क में हैं और संस्था मीडिया में आध्यात्मिक मूल्यों के समावेश के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज विश्व तनाव, संघर्ष और अशांति के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में पत्रकारों का दायित्व केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज को नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर ले जाना भी है।
तिल्दा प्रेस क्लब के संरक्षक गौरीशंकर सैनी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां चिंताजनक हैं और विश्व युद्ध जैसी आशंकाओं के बीच पत्रकारों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने पत्रकारों से अपनी लेखनी के माध्यम से संवाद, समाधान और शांति का मार्ग प्रशस्त करने का आह्वान किया।
वरिष्ठ पत्रकार प्रियंका कौशल ने कहा कि “जब हम बदलेंगे, तब विश्व बदलेगा” ब्रह्माकुमारीज़ का यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि विश्व शांति की शुरुआत स्वयं के परिवर्तन से होती है। पत्रकारों को सत्यनिष्ठ, निर्भीक एवं लोकमंगल की भावना से कार्य करना चाहिए। उन्होंने अपने 25 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव साझा करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ की शिक्षाओं ने उन्हें हर कदम पर निष्पक्ष एवं ईमानदार पत्रकारिता करने की प्रेरणा दी।
वरिष्ठ पत्रकार विशाल भाई ने कहा कि पत्रकारों को प्रत्येक दिन की शुरुआत सकारात्मक विचारों से करनी चाहिए। सकारात्मक चिंतन से न केवल जीवन में शांति आती है बल्कि समाज में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र रथ गौरव ने कहा कि विश्व शांति का आधार आत्मशांति है। भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना विश्व को एक परिवार मानने की शिक्षा देती है और आज इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा की संचालिका बीके प्रियंका ने कहा कि राजयोग एवं आध्यात्मिक ज्ञान मानव जीवन की समस्याओं के समाधान का अक्षय भंडार है। यदि व्यक्ति स्वयं को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बना ले तो वह अपने साथ-साथ समाज को भी सकारात्मक दिशा दे सकता है।
अंत में पार्षद रानी सौरभ जैन ने सभी पत्रकारों, अतिथियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं तथा उनकी भूमिका मंचासीन अतिथियों के समान ही महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथियों का सम्मान किया गया तथा उपस्थित सभी पत्रकारों को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित पत्रकारों ने इस आयोजन को पत्रकारिता में सकारात्मकता, नैतिक मूल्यों एवं वैश्विक शांति के संदेश को बढ़ावा देने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया।

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