मुरिया दरबार और माड़िया चौक के नामकरण पर उठे सवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष सूयल नाग ने सांसद-विधायकों से मांगा जवाब
प्रेस विज्ञप्ति
भीम आर्मी भारत एकता मिशन, छत्तीसगढ़
जगदलपुर, बस्तर। बस्तर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आदिवासी पहचान से जुड़े मुरिया दरबार और माड़िया चौक के नामकरण का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। इस मुद्दे पर भीम आर्मी भारत एकता मिशन, छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष सूयल नाग ने सवाल उठाते हुए कहा कि बस्तर की पहचान, आदिवासी समाज की परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े निर्णयों में स्थानीय समाज की भावनाओं एवं भागीदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सूयल नाग ने कहा कि मुरिया दरबार बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। माड़िया समाज की परंपराएं भी बस्तर की ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में इनसे जुड़े नामकरण के विषय पर संबंधित समाज को विश्वास में लेना और निर्णय के आधार को सार्वजनिक करना आवश्यक है।
उन्होंने बस्तर के सांसद, विधायकों एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल किया कि मुरिया दरबार और माड़िया चौक के नामकरण का आधार क्या है? क्या इस संबंध में स्थानीय आदिवासी समाज से चर्चा की गई है? यदि चर्चा हुई है, तो समाज के सुझावों को कितना महत्व दिया गया?
सूयल नाग ने कहा कि बस्तर में विकास के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। किसी भी निर्णय में पारदर्शिता होनी चाहिए और जनता को यह जानने का अधिकार है कि सार्वजनिक स्थलों के नामकरण के पीछे क्या आधार और प्रक्रिया अपनाई गई है।
उन्होंने कहा कि भीम आर्मी भारत एकता मिशन इस विषय को गंभीरता से उठाएगा तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से जवाब मांगेगा। आवश्यकता पड़ने पर संगठन की ओर से ज्ञापन सौंपकर इस मामले में तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी की जाएगी।
सूयल नाग ने कहा, "बस्तर की पहचान यहां की जल-जंगल-जमीन, आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से है। इनसे जुड़े फैसलों में स्थानीय समाज की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता के सवालों का जवाब दें और हर निर्णय में पारदर्शिता सुनिश्चित करें।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि भीम आर्मी भारत एकता मिशन इस मुद्दे को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उठाएगा, ताकि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और मूलनिवासी समाज के सम्मान से जुड़े सवालों पर स्पष्टता आ सके।
जारीकर्ता:
सूयल नाग
प्रदेश उपाध्यक्ष
भीम आर्मी भारत एकता मिशन, छत्तीसगढ़
बस्तर संभाग
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