भालू के खौफ से स्कूल में तालाबंदी, ग्रामीणों का धरना बोले- पहले बच्चों की सुरक्षा, फिर पढ़ाई
नरहरपुर। कांकेर जिले के नरहरपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम लारगांव के मारकाटोला गांव में भालू के लगातार हमलों से फैले भय के बीच ग्रामीणों का आक्रोश शुक्रवार को स्कूल तक पहुंच गया। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और परिसर के सामने धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल परिसर में जल्द से जल्द बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जाए तथा वन विभाग और प्रशासन क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव और स्कूल के आसपास जंगली भालुओं की लगातार आवाजाही बनी हुई है। ऐसे में बिना सुरक्षा व्यवस्था के बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं है। उनका कहना है कि बच्चों की जान जोखिम में डालकर पढ़ाई नहीं कराई जा सकती। इसलिए सुरक्षा सुनिश्चित होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों के आक्रोश की वजह हाल ही में हुई दर्दनाक घटना है। 5 अगस्त को एक मादा भालू के हमले में एक ही परिवार के तीन भाई-बहन गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनमें दो की मौत हो गई, जबकि एक युवती का उपचार जारी है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। लगातार हो रहे वन्यजीव हमलों से ग्रामीणों में भय और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल परिसर में तत्काल बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जाए, वन विभाग क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाए, जंगली जानवरों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाए तथा ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी एवं स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही वन्यजीवों से बचाव के संबंध में लोगों को जागरूक करने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई बाधित करना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जब तक स्कूल और आसपास का क्षेत्र सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इधर, स्कूल में तालाबंदी और धरने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे प्रशासन के सामने सुरक्षा और शिक्षा—दोनों को संतुलित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। अब पूरे मामले में ग्रामीणों की नजर प्रशासन और वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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