नशे के खिलाफ अभियान या सियासी नाटक
कांकेर, छत्तीसगढ़, अपनी आदिवासी संस्कृति और शांति के लिए जाना जाता है, लेकिन आज नशे की चपेट में है। हाल के दिनों में नशे से जुड़ी घटनाएँ, चोरी से लेकर हत्या तक, बढ़ रही हैं। प्रशासन ने नशे के खिलाफ छापेमारी और जागरूकता अभियान शुरू किया। कांग्रेस ने भी नशे के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
लेकिन इस गंभीर माहौल में सत्ताधारी भाजपा विधायक का "चाय सुट्टा बार" का उद्घाटन हैरान करने वाला है। "सुट्टा" जैसे नाम का प्रचार, भले ही दुकान में नशीले पदार्थ न हों, नशे को सामान्य बनाता है। यह युवाओं को गलत संदेश देता है कि नशा "स्वीकार्य" है।
*भाजपा का दोहरापन*
एक तरफ प्रशासन नशे के खिलाफ लड़ रहा है, दूसरी तरफ भाजपा विधायक ऐसी दुकान का फीता काट रहे हैं। यह दोहरा चरित्र नशे के खिलाफ अभियान को कमजोर करता है और सवाल उठाता है: क्या भाजपा नशे की समस्या को गंभीरता से ले रही है? क्या कांकेर की संस्कृति और युवाओं का भविष्य सियासी ढोंग का शिकार हो रहा है?
*कांकेर की संस्कृति खतरे में*
नशा कांकेर की आदिवासी संस्कृति को नष्ट कर रहा है। जब सत्ता में बैठे लोग "सुट्टा बार" जैसे नामों को बढ़ावा देते हैं, तो यह संस्कृति की रक्षा की बातों पर सवाल उठाता है।
जागो, कांकेर!
कांकेर की जनता को इस दोहरेपन के खिलाफ आवाज उठानी होगी। नशे को सामान्य बनाने वाली हर कोशिश का विरोध करें। प्रशासन से मांग करें कि नशे के नेटवर्क को खत्म किया जाए। भाजपा को जवाबदेह बनाएँ। अगर आज चुप रहे, तो कल कांकेर का भविष्य नशे की भेंट चढ़ जाएगा।
*सवाल भाजपा से:*
नशे के खिलाफ अभियान में आपका विधायक "सुट्टा बार" का उद्घाटन क्यों कर रहा है?
क्या यह नैतिकता और जवाबदेही की कमी नहीं दर्शाता?
आह्वान: नशे के खिलाफ एकजुट हों। कांकेर को नशामुक्त बनाएँ, ताकि हमारी संस्कृति और युवा सुरक्षित रहें।
#नशामुक्त_कांकेर #भाजपा_जवाबदो

0 Comments
Post a Comment