कच्चे गोदावरी माइंस विस्तार पर विरोध तेज: चंद्रमौलि मिश्रा ने लगाया 'खुले नियम उल्लंघन' का गंभीर आरोप
*TOP NEWS छत्तीसगढ़ भानुप्रतापपुर से संतोष बाजपेयी की रिपोर्ट*
*भानुप्रतापपुर*
भानुप्रतापपुर गोदावरी माइंस कच्चे के प्रस्तावित विस्तार को लेकर स्थानीय क्षेत्र में विरोध की लहर तेज़ हो गई है। माइंस प्रबंधन द्वारा खनन क्षेत्र को मौजूदा 138.96 हेक्टेयर से बढ़ाकर 200 हेक्टेयर करने की योजना के खिलाफ आगामी 13 तारीख को रखी गई जनसुनवाई का स्थानीय नेता चंद्रमौलि मिश्रा और किसानों ने कड़ा विरोध किया है। मिश्रा ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि माइंस प्रबंधन ने वन विभाग और किसानों की ज़मीन का अधिग्रहण करते समय नियमों का खुला उल्लंघन किया है। वन विभाग के नियमों की अवहेलना और अवैध कटाई चंद्रमौलि मिश्रा ने सबसे गंभीर आरोप वन विभाग की ज़मीन के अवैधानिक अधिग्रहण को लेकर लगाया है।
अवैधानिक कब्ज़ा: मिश्रा के अनुसार, गोदावरी माइंस ने वन विभाग की ज़मीन को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया या अनुमति का पालन किए अपने कब्जे में ले लिया और उसे माइनिंग लीज एरिया में शामिल कर लिया।
5000 पेड़ों की अवैध कटाई का आरोप: उन्होंने हाल ही में कंपनी पर लगभग 5000 पेड़ों की अवैध कटाई का गंभीर आरोप लगाया था। इस मामले में, उन्होंने वन विभाग की निष्क्रियता और माइंस प्रबंधन के साथ संभावित मिलीभगत पर भी सवाल उठाए, जो स्थानीय पर्यावरण और वन संपदा को खतरे में डाल रहा है।
किसानों की ज़मीन का अनियमित अधिग्रहण माइंस विस्तार के विरोध का एक मुख्य आधार किसानों की ज़मीन का अनियमित अधिग्रहण भी है।
खुली अवहेलना: मिश्रा ने स्पष्ट किया कि कंपनी ने किसानों की ज़मीन खरीदते या अधिग्रहित करते समय भूमि अधिग्रहण के नियमों की खुली अवहेलना की है।
अनियमित समावेश: अधिग्रहण प्रक्रिया में नियमों का पालन किए बिना ही, किसानों की ज़मीन को सीधे माइनिंग लीज एरिया में शामिल कर लिया गया, जिससे प्रभावित किसानों के अधिकार और न्याय सुनिश्चित नहीं हो पाए हैं।
खुला नियमी उल्लंघन' का दावा
चंद्रमौलि मिश्रा ने इस पूरी प्रक्रिया को 'खुले नियम का उल्लंघन' करार दिया है।
> उन्होंने कहा, "कंपनी द्वारा यह पूरी प्रक्रिया सत्ता और प्रभाव का दुरुपयोग है, जो यह दर्शाता है कि माइंस प्रबंधन स्थानीय संसाधनों का मनमाने ढंग से दोहन कर रहा है। बिना किसी नियम की परवाह किए, ज़मीन का अधिग्रहण और खनन क्षेत्र का विस्तार स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी है।
आगामी 13 तारीख को होने वाली जनसुनवाई में यह विरोध और भी उग्र रूप ले सकता है, क्योंकि स्थानीय समुदाय और किसानों ने प्रस्तावित विस्तार को रोकने की कसम खाई है। उनका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी औद्योगिक विकास से पहले वैधानिक नियमों का सख्ती से पालन हो और स्थानीय पर्यावरण व आजीविका सुरक्षित रहे।


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