दुर्गुकोंडल में रेत तस्करी और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ फूटा आदिवासियों का आक्रोश

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*TOP NEWS छत्तीसगढ़ जिला उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामीण से संतोष बाजपेयी की रिपोर्ट* 

*भानुप्रतापपुर*

 जिले के दुर्गुकोंदल क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत उत्खनन और पांचवीं अनुसूची के संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने मोर्चा खोल दिया है। अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी के प्रवास के दौरान समाज ने एक तीखा ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में हो रही प्राकृतिक लूट और माइनिंग विभाग के कथित भ्रष्टाचार पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

*मशीनों से चीर रहे नदियों का सीना, पर्यावरण पर संकट*

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि दुर्गुकोंडल के नदी-नालों से भारी मशीनों द्वारा दिन-रात अंधाधुंध रेत निकाली जा रही है। नियमों को ताक पर रखकर तस्कर न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि ओवरलोड वाहनों के जरिए सड़कों को भी तबाह कर रहे हैं। इस अवैध कारोबार से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है, वहीं स्थानीय आदिवासियों की कृषि भूमि और जलस्रोत सूखने की कगार पर हैं।

*पांचवीं अनुसूची के उल्लंघन का आरोप*

सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित है, जहाँ ग्राम सभा की अनुमति के बिना कोई भी खनन कार्य करना असंवैधानिक है। समाज ने सीधा आरोप लगाया कि माइनिंग अधिकारियों के भ्रष्ट रवैये और संरक्षण के कारण ही तस्करों के हौसले बुलंद हैं। बस्तर की प्राकृतिक धरोहर, जिसे बचाने की जिम्मेदारी प्रशासन की है, उसे मिलीभगत कर बेचा जा रहा है।

*ज्ञापन की मुख्य मांगें:*

अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक: नदी-नालों में चल रही पोकलेन और जेसीबी मशीनों को तत्काल जब्त किया जाए।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: भ्रष्टाचार में संलिप्त माइनिंग अधिकारियों की जांच कर उन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो।

ग्राम सभा के अधिकारों का संरक्षण: पांचवीं अनुसूची का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए।

पर्यावरण बहाली: रेत तस्करी से हुए नुकसान की भरपाई और जलस्रोतों के संरक्षण हेतु ठोस कदम उठाए जाएं।

यह केवल रेत की चोरी नहीं, बल्कि आदिवासियों के अस्तित्व और उनकी जमीन पर हमला है। यदि प्रशासन ने जल्द ही इन रेत माफियाओं पर नकेल नहीं कसी, तो समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

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