रसोइयों की 2 महीने की हड़ताल के बाद अन्यायपूर्ण वापसी और सरकार कर रही है कर्मचारियों का शोषण-शिवसेना
*TOP NEWS छत्तीसगढ़ जिला उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामीण से संतोष बाजपेयी की रिपोर्ट*
*भानुप्रतापपुर, शिवसेना भानुप्रतापपुर द्वारा रसोईया संघ मानदेय में वृद्धि को लेकर मुख्यमंत्री के नाम भानुप्रतापपुर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन। शिवसेना प्रदेश सचिव महेश वासुदेव दुबे ने कहा 26/27 का बजट आने पर जहां भाजपा सरकार व उनके कार्यकर्ता इसे रोजगारोंन्मुखी बजट बताकर अपने हाथ से स्वयं पीठ थपथपा रही है और वाहवाही लूटा रही है वही जमीनी स्तर पर रसोईया और अन्य कम वेतन वाले कर्मचारियों को महंगाई और कम आय के कारण अभी भी बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि भाजपा सरकार के द्वारा चुनावी घोषणापत्र में कहा गया था। हम सत्ता में आते हैं तो रसोइयों का मानदेय में 50% वृद्धि की जावेगी। किंतु सत्ता में आए पूरे 2 साल हो चुका है फिर भी वेतन में कहीं वृद्धि नहीं किया गया। जिसके वजह से छत्तीसगढ़ के मध्यान भोजन मी डे मील योजना के अंतर्गत स्कूल में कार्यरत रसोइयों ने अपनी मांगों को लेकर दो महीने तक कड़ी धूप में रायपुर के तुता धरना स्थल पर संघर्ष किया। लेकिन सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना कर उन्हें शून्य या महज 2000 रूपए के अत्यंत कम मानदेय पर काम पर लौटने के लिए मजबूर किया है। विदित हो प्रदेश में रसोईयां कर्मचारी विगत 30 वर्षों से कार्य कर रही हैं और इतना कम मानदेय पर काम करने के लिए मजबूरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं जो महंगाई के इस दौर में जीवन यापन के लिए अपर्याप्त है उन्होंने आगे कहां रसोईया की शून्य/पुरानी शर्तों पर वापसी और तुच्छ मानदेय पर सरकार का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। छत्तीसगढ़ प्रदेश के रसोईयां संघ ने अपने जायज अधिकारों और मानदेय वृद्धि के लिए दो महीने तक का हड़ताल किया। लेकिन राज्य सरकार की संवेदनहीनता के कारण रसोइयों को बिना किसी ठोस आश्वासन के शुन्य पर वापस काम पर लौटना पड़ा है यह इस प्रदेश के मेहनतकशों के लिए सबसे काला दिन है क्या सरकार रसोइयों को बंधुआ मजदूर समझती है महंगाई की इस दौर में रसोईया संघ के साथ हुआ यह व्यवहार न केवल शोषणकारी है बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है। 2000 प्रतिमाह के मानदेय में एक परिवार का जीवन यापन कैसे संभव है। शिवसेना ने रायपुर के तुता धरना स्थल कि इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और रसोइयों का शोषण बताया है। और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग करती है की हड़ताल अवधि के रसोइयों को बिना किसी दमनकारी नीति के वापस काम पर लिया जाएं, मानदेय को तत्काल बढ़ाकर सम्मानजनक किया जाएं, रसोइयों को नियमित कर्मचारियों का दर्जा दिया जाएं, धरना के दौरान मृत्यु हुई रसोईयां कर्मचारी परिवार को 50-50 लाख मुआवजा दिया जाएं, 2 महीने की हड़ताल अवधि का मानदेय जारी किया जाएं, कलेक्टर दर मान्यता देते हुए न्यूनतम वेतन प्रतिमाह 10,000 रुपए की गारंटी एवं स्थाई कर्मचारी का दर्जा दिया जाएं, यदि सरकार ने जल्द ही रसोइयों की स्थिति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करके उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि नहीं किया तो शिवसेना उद्धव बाला साहेब ठाकरे द्वारा प्रदेश के समस्त रसोईया संघ को साथ लेकर उग्रआंदोलन के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन सौंपने वाले में प्रमुख रूप से अनेश नुरूटी चेतन भुआर्य भोलाराम नेताम डिपेंद्र कुंजाम इत्यादि शिव सैनिक उपस्थित थे।*


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