भानुप्रतापपुर वन मंडल में 22 लाख का खेल! बांसला जंगल में ANR कार्य बना भ्रष्टाचार का अड्डा

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*TOP NEWS छत्तीसगढ़ जिला उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामीण से संतोष बाजपेयी की रिपोर्ट*

*भानुप्रतापपुर*

 पूर्व वन मंडल भानुप्रतापपुर के अंतर्गत बांसला जंगल में एएनआर (ANR) कार्य के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कागजों में पूर्ण दिखाए गए कार्य की जमीनी हकीकत अधूरी और संदिग्ध नजर आ रही है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

*कागजों में पूरा, जमीन पर अधूरा काम*

जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष कूप कटाई के बाद जंगल के संरक्षण हेतु एएनआर कार्य के तहत फेंसिंग और सुरक्षा व्यवस्था की जानी थी। इसके लिए संबंधित फर्मों को मटेरियल सप्लाई के नाम पर करीब 22 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

हालांकि, मौके पर निरीक्षण में पाया गया कि फेंसिंग का कार्य अधूरा है और पर्याप्त सामग्री भी उपलब्ध नहीं है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि भुगतान के अनुपात में कार्य नहीं हुआ।

*मजदूरी भुगतान में भी गड़बड़ी के आरोप*

मामला केवल मटेरियल तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि मस्टररोल और वाउचर में ऐसे लोगों के नाम जोड़े जा रहे हैं, जिन्होंने कार्यस्थल पर कोई काम नहीं किया।

वहीं, वास्तविक मजदूरों को या तो पूरा भुगतान नहीं मिला या उन्हें सूची से ही बाहर रखा गया है। इससे मजदूरी भुगतान में फर्जीवाड़े की आशंका और गहरा गई है।

कमीशन तंत्र पर उठे सवाल

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कथित कमीशनखोरी का जाल फैला हुआ है। आरोप है कि निचले स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक भुगतान का हिस्सा पहुंचता है, जिसके कारण अधूरे कार्य के बावजूद फाइलें आसानी से स्वीकृत हो जाती हैं।

*जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें*

बांसला जंगल में सामने आए इस मामले ने वन विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या उच्च स्तर पर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाती है और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है, या फिर मामला अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।

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