भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण नल-जल योजना बंद, 40 परिवारों पर गहराया जल संकट

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कांकेर। भीषण गर्मी के बीच कांकेर जिले के चारामा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरटरा के आश्रित ग्राम जामबहार में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गांव के लगभग 40 परिवार पिछले कई महीनों से गंभीर जल समस्या का सामना कर रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि ग्रामीणों को पीने के पानी के साथ-साथ नहाने, खाना बनाने, कपड़े धोने और पशुओं को पानी पिलाने के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में मौजूद अधिकांश हैंडपंप और बोरवेल खराब पड़े हुए हैं। वर्तमान में केवल एक बोरवेल ही चालू स्थिति में है, लेकिन उसमें भी मात्र 10 मिनट तक पानी आता है और फिर करीब एक घंटे तक पानी का इंतजार करना पड़ता है। पानी भरने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार पानी खत्म हो जाने के कारण लोगों को खाली बर्तन लेकर वापस लौटना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत गांव में स्थापित नल-जल योजना फरवरी 2026 से बंद पड़ी हुई है। योजना के लिए बनाई गई बिजली लाइन दो स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है, जिसके कारण जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसकी जानकारी कई बार ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं कराई गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बिजली लाइन की मरम्मत कर दी जाती तो गांव को इस भीषण जल संकट का सामना नहीं करना पडता। विभागीय लापरवाही और उदासीनता का खामियाजा सीधे ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

पानी की विकट समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने स्वयं पहल करते हुए आपस में चंदा एकत्रित कर करीब तीन वर्षों से बंद पड़े एक बोरवेल की मरम्मत करवाई और उसे चालू कराया। हालांकि यह प्रयास भी पूरी तरह सफल नहीं हो सका। बोरवेल से सीमित समय तक ही पानी निकलता है, जिससे गांव की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।

सुबह होते ही ग्रामीण अपने-अपने बर्तन, बाल्टी और डिब्बे लेकर बोरवेल के पास पहुंच जाते हैं। पानी की एक-एक बूंद के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।

जल संकट की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जामबहार के ग्रामीण अब आसपास के गांवों पर निर्भर हो गए हैं। कई परिवारों को अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए कई किलोमीटर दूर स्थित गांवों से पानी लाना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पानी की कमी के कारण घरों में भोजन बनाना, बर्तन साफ करना, कपड़े धोना और साफ-सफाई बनाए रखना मुश्किल हो गया है। वहीं पशुपालकों की चिंता भी बढ़ गई है क्योंकि पशुओं को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।

ग्राम कोरटरा के पूर्व सरपंच धंसाय सेवता ने बताया कि गांव में पिछले दो महीनों से पेयजल संकट चरम पर है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण नहाने के लिए आसपास के गांवों के तालाबों का सहारा लेते हैं, लेकिन भीषण गर्मी के कारण अधिकांश तालाब भी सूख चुके हैं।

उन्होंने बताया कि पानी की भारी कमी के चलते गांव में बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर नहाने के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। पशुओं के लिए भी पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से पानी टैंकर भेजने की मांग की गई, लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

ग्राम पंचायत की पंच निर्मला ने बताया कि पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू कार्य करना बेहद कठिन हो गया है। गंदे बर्तन साफ करने के लिए महिलाओं को लगभग एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

निर्मला के अनुसार पानी के अभाव में घर में खाना बनाना, साफ-सफाई करना और बच्चों की देखभाल करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार पूरा दिन पानी की व्यवस्था करने में ही निकल जाता है।

गांव का दृश्य किसी राहत शिविर से कम नहीं दिखाई देता। ग्रामीण अपने-अपने बर्तन, बाल्टियां और डिब्बे लेकर घंटों लाइन में खड़े रहते हैं। पानी आने की उम्मीद में लोग अपनी बारी का इंतजार करते हैं, लेकिन कई बार बीच में ही पानी बंद हो जाता है और लोगों को निराश होकर लौटना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अपनी समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

भीषण गर्मी के दौरान एक पूरे गांव का पेयजल संकट से जूझना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते खराब हैंडपंपों, बोरवेलों और नल-जल योजना की मरम्मत कर दी जाती तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होते।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पानी टैंकर की व्यवस्था, क्षतिग्रस्त बिजली लाइन और पाइपलाइन की मरम्मत, बंद पड़े हैंडपंपों के सुधार तथा स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

गांव के 40 परिवार आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भीषण गर्मी में बढ़ती परेशानी के बीच ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर टिकी हुई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जामबहार के ग्रामीणों को इस गंभीर जल संकट से कब राहत मिलेगी और कब तक उन्हें पानी के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ेगा।

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