माटवाड़ा लाल गांव 77 लाख की नल-जल योजना फेल, टैंकरों के सहारे बुझ रही ग्रामीणों की प्यास, भीषण गर्मी में पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण, सूखे हैंडपंप और बंद पड़े निजी बोरवेल, भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों के बीच ग्रामीणों ने प्रशासन से की जांच और कार्रवाई की मांग
कांकेर। कांकेर जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम माटवाड़ा लाल इन दिनों भीषण जल संकट की चपेट में है। तेज गर्मी और गिरते भूजल स्तर ने गांव की स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। गांव में पेयजल की भारी कमी के कारण ग्रामीणों को रोजाना पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। शासन की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना पूरी तरह विफल साबित होने के बाद अब ग्रामीणों की प्यास टैंकरों के सहारे बुझाई जा रही है।
करीब 1500 की आबादी वाले इस गांव में कुल 11 हैंडपंप लगाए गए हैं, लेकिन इनमें से केवल 5 ही चालू हालत में हैं। वहीं 2 हैंडपंपों में बोर मशीन फिट की गई है, जबकि बाकी हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि गांव के कई घरों में लगे निजी बोरवेलों ने भी पानी देना बंद कर दिया है।
सुबह होते ही गांव में पानी के लिए लोगों की लंबी कतारें लग जाती हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे दूर-दूर तक पानी भरने के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई परिवारों को जरूरत भर पानी तक नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गर्मियों में जल संकट होता है, लेकिन इस बार हालात सबसे ज्यादा भयावह हैं।
भीषण संकट के बीच गांव के एक किसान ने मानवता दिखाते हुए अपने निजी बोरवेल से ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराया है। पंचायत के सरपंच, उपसरपंच और ग्रामीण लगातार प्रयास कर टैंकरों के माध्यम से गांव में पानी पहुंचा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई मोहल्लों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में नल-जल योजना के तहत लगभग 77 लाख रुपये से अधिक की लागत से पानी टंकी, पाइप लाइन और घर-घर नल कनेक्शन का कार्य कराया गया था, लेकिन योजना धरातल पर पूरी तरह असफल साबित हुई।
जानकारी के अनुसार योजना को प्रशासनिक स्वीकृति 29 जनवरी 2025 को मिली थी, जबकि कार्य पूर्ण होने की तिथि 25 जनवरी 2024 दर्शाई जा रही है। दस्तावेजों में दर्ज इस गड़बड़ी को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले में भारी भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की आशंका नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि बनाई गई पानी टंकी में कई जगह लीकेज है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है। वहीं गांव में बिछाई गई पाइप लाइन की अब तक तीन बार टेस्टिंग की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद केवल लगभग 30 घरों तक ही पानी पहुंच पाया है। जिन घरों तक पानी पहुंच भी रहा है, वहां भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रही।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही, घटिया सामग्री का उपयोग और भ्रष्टाचार किया गया है। यदि योजना का कार्य गुणवत्ता और ईमानदारी के साथ किया गया होता, तो आज गांव के लोगों को पानी के लिए टैंकरों और निजी बोरवेलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए लोगों को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खराब हैंडपंपों को तत्काल सुधारा जाए, नल-जल योजना की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
भीषण गर्मी के बीच माटवाड़ा लाल गांव के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं और शासन-प्रशासन से जल्द राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। गांव में फैलते जल संकट ने शासन की नल-जल योजना की जमीनी हकीकत और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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