जन सहयोग” की भावुक अपील,मातृस्वरूपा दूध नदी को बचाने आगे आएं शहरवासी

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कांकेर शहर की जीवन रेखा मानी जाने वाली दूध नदी को बचाने के लिए सामाजिक संस्था “जन सहयोग” ने शहरवासियों से मार्मिक अपील की है। संस्था ने कहा है कि कभी स्वच्छ और मीठे जल से भरपूर रहने वाली दूध नदी आज प्रदूषण और लोगों की लापरवाही के कारण अपना अस्तित्व खोती जा रही है।


संस्था के सदस्यों ने बताया कि लगभग 40 से 50 वर्ष पहले तक दूध नदी का पानी इतना साफ होता था कि लोग घरों में उपयोग के लिए नदी का जल ले जाते थे। गर्मी के दिनों में नदी किनारे लोगों की चहल-पहल रहती थी, लेकिन अब नदी में पानी की जगह कीचड़ और कचरे का अंबार दिखाई देता है।


“जन सहयोग” द्वारा वर्षों से “दूध नदी बचाओ महाभियान” चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत नदी के उद्गम स्थल से पैदल यात्रा, साइकिल यात्रा और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। वर्तमान विधायक आशाराम नेताम भी विधायक बनने से पहले इस अभियान में शामिल हो चुके हैं।


फिलहाल नदी किनारे रिटेनिंग वॉल निर्माण कार्य चलने के कारण अभियान स्थगित है, लेकिन संस्था ने खासकर नदी किनारे रहने वाले लोगों और व्यापारियों से अपील की है कि वे कूड़ा-कचरा नदी में न फेंकें और नगर पालिका की कचरा प्रबंधन सेवाओं का उपयोग करें।


संस्था का कहना है कि यदि लोग स्वयं जागरूक होकर नदी में कचरा फेंकना बंद कर दें, तो कुछ ही समय में दूध नदी में फिर से स्वच्छ जलधारा दिखाई देने लगेगी। समाजसेवियों ने इसे केवल अभियान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और शहर की पहचान से जुड़ा विषय बताया है।


बाइट :

“दूध नदी हमारी मातृस्वरूपा और कांकेर की जीवन रेखा है। इसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि हर नागरिक थोड़ा सहयोग करे और नदी में कचरा फेंकना बंद कर दे, तो दूध नदी फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट सकती है।”

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