कांकेर: सामाजिक सद्भाव बैठक में एकजुटता और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर
कांकेर नगर के माखन भोग रेस्टोरेंट के हाल में गुरुवार आज “सामाजिक सद्भाव बैठक” का आयोजन किया गया। इस बैठक में नगर एवं विकासखंड के विभिन्न समाजों के प्रमुखों की सहभागिता रही, जिसमें लगभग 35 जाति-समाजों के प्रतिनिधि और करीब 100 लोग उपस्थित हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र पर मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर वर्मा, तोमर जी एवं समाज के अन्य प्रमुखों द्वारा पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद परिचय सत्र आयोजित किया गया।
अपने उद्बोधन में श्री वर्मा ने “हिंदू” की परिभाषा बताते हुए कहा कि जो इस धरती को माता मानता है और राष्ट्र की अखंडता व उन्नति के लिए समर्पित रहता है, वही सच्चा हिंदू है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था थी, जिसे बाद में विभाजन की भावना से जाति व्यवस्था में परिवर्तित किया गया।
उन्होंने समाज की तुलना मानव शरीर से करते हुए कहा कि जैसे शरीर के सभी अंग मिलकर उसे पूर्ण बनाते हैं, उसी प्रकार समाज के सभी वर्गों का एकजुट रहना आवश्यक है। किसी भी अंग के कमजोर होने से पूरा शरीर प्रभावित होता है, ठीक वैसे ही समाज में विभाजन उसकी कमजोरी का कारण बनता है।
बैठक में सामाजिक एकता, परिवार व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। वर्मा ने सुझाव दिया कि परिवारों को सप्ताह में कम से कम एक दिन साथ बैठकर भोजन, भजन एवं सांस्कृतिक चर्चा करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने युवाओं को संस्कारवान बनाने और बाजारवाद के प्रभाव से बचाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज की समस्याओं को “हमारा” नहीं बल्कि “मेरा” समझकर समाधान की दिशा में कार्य करना चाहिए। इसके साथ ही सभी समाजों से आपसी भेदभाव भुलाकर एकजुट रहने और सामूहिक रूप से सकारात्मक कार्य करने का आह्वान किया गया।
बैठक में विभिन्न समाज प्रतिनिधियों सियाराम धनकर, भुनेश्वर पटेल, पंचुराम नायक, भगवान लाल टांक, हेमलाल जैन, हेमंत टांकसाले, ईश्वर कावड़े, विजय मंडावी, मनोज हड़प सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए समाज सुधार और कुरीतियों को दूर करने के प्रयासों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में श्री पोखन सिन्हा ने सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। सामूहिक रूप से “वंदे मातरम्” का गायन किया गया तथा अल्पाहार के बाद सभी प्रतिभागी अपने-अपने घरों के लिए प्रस्थान किए।
यह बैठक सामाजिक समरसता, एकता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।


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