अलादीन के चिराग और जिनी की कहानी से बच्चों ने सीखा सही सोचने का तरीका तिल्दा के ब्रह्माकुमारीज समर कैंप में बच्चों का उत्साह बढ़ाने पहुंचे पार्षद रानी दीदी और सौरभ भैया

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तिल्दा में ब्रह्माकुमारीज द्वारा आयोजित समर कैंप के छठवें दिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक सत्र का आयोजन किया गया। इस विशेष क्लास में अदानी पावर के एसोसिएट मैनेजर भ्राता आकाश धुरंधर विशेष रूप से बच्चों को मार्गदर्शन देने उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों को सकारात्मक सोच की शक्ति को अलादीन के चिराग और जिनी की रोचक कहानी के माध्यम से सरलता से समझाया।

उन्होंने बताया कि जैसे अलादीन के चिराग से जिनी निकलकर हर आदेश को पूरा करता था, उसी प्रकार हमारे पास भी एक अद्भुत चिराग है — हमारा मन। मन से निकलने वाले विचार उस जिनी की तरह कार्य करते हैं। हम जैसा सोचते हैं, वैसी ही हमारी वास्तविकता धीरे-धीरे बनती जाती है। मानो यह प्रकृति हमसे कह रही हो — “आप जो भी सोचेंगे, उसे पूरा करना मेरा धर्म है… जो हुकुम मेरे आका।”

उन्होंने कई प्रेरणादायक उदाहरणों के माध्यम से मन की शक्ति को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि महानायक Amitabh Bachchan को प्रारंभ में रेडियो में नौकरी के लिए उनकी आवाज़ के कारण अस्वीकार कर दिया गया था। वहीं Sachin Tendulkar का लोग उनकी कम उम्र और छोटे कद के कारण मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन इन दोनों महान व्यक्तित्वों ने अपने भीतर कभी नकारात्मक विचारों को स्थान नहीं दिया और आगे चलकर विश्वभर में अपनी अलग पहचान बनाई।

इसी प्रकार Arunima Sinha का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक दुर्घटना में दोनों पैर खो देने के बाद भी उन्होंने स्वयं को किसी पर बोझ नहीं बनने दिया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर यह सिद्ध करेंगी कि वे भी सक्षम हैं, और कृत्रिम पैरों के सहारे उन्होंने यह असंभव कार्य कर दिखाया।

भ्राता आकाश ने बच्चों को समझाया कि हमारा दिमाग हार्डवेयर की तरह है और मन उसमें कार्य करने वाले सॉफ्टवेयर की तरह। सभी के पास अत्यंत शक्तिशाली हार्डवेयर है, लेकिन यदि हम नकारात्मक सोच रूपी गलत सॉफ्टवेयर का उपयोग करेंगे तो जीवन में श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

कई रोचक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को मन और बुद्धि के कार्य करने की प्रक्रिया समझाई गई। उन्होंने बताया कि जब हमारे मन में कोई विचार आता है, जैसे एक मिठाई खाने के बाद दूसरी खाने का विचार, या किसी डर के कारण सच छिपाने का विचार, तब मन विभिन्न विकल्प उत्पन्न करता है। फिर बुद्धि एक न्यायाधीश की तरह उनमें से निर्णय लेती है और वही निर्णय संस्कारों की डायरी में रिकॉर्ड हो जाता है।

एक अन्य गतिविधि में बच्चों को विभिन्न परिस्थितियाँ देकर पूछा गया कि सामान्यतः हम उनमें कैसे सोचते हैं और सही सोच क्या हो सकती है। जैसे — पापा ने डांट दिया, टीचर ने सरप्राइज टेस्ट की घोषणा कर दी, मम्मी ने मोबाइल देखने से मना कर दिया या दुकानदार ने सामान देने में देर कर दी। इन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच कैसे रखी जा सकती है, यह बच्चों ने स्वयं बड़े उत्साह से बताया।

ईक्यू और आईक्यू का अंतर स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि अच्छी सोच से हमारा ईक्यू अर्थात इमोशनल कोशेंट बढ़ता है। आज जीवन में सफलता प्राप्त करने में लगभग 80 प्रतिशत भूमिका ईक्यू की और 20 प्रतिशत भूमिका आईक्यू की होती है। ईक्यू का अर्थ है — विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने की क्षमता। सकारात्मक सोच और उच्च ईक्यू विकसित करने के लिए मेडिटेशन को एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बताते हुए उन्होंने उसके मूल सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला।

अंत में उन्होंने बच्चों को मेडिटेशन का अभ्यास कराया तथा अपने लक्ष्य और भविष्य के स्वरूप का स्पष्ट विज़न मन में बनाने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने भी पूरे एकाग्र भाव से इस अभ्यास में भाग लिया।

रानी और सौरभ जैन ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में बच्चों के प्रत्येक समूह को एक नाटक प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। सभी समूहों को एक-एक वस्तु दी गई, जिसका विज्ञापन भी उन्हें अपने नाटक में शामिल करना था, जैसे — हेयर ऑयल, वूमेन्स प्लस प्रोटीन पाउडर, डेटॉल आदि। साथ ही प्रत्येक नाटक को किसी न किसी मूल्य जैसे ईमानदारी, अनुशासन, सहयोग, टीमवर्क एवं करुणा पर आधारित बनाना था।

इस सत्र को जज करने एवं बच्चों का उत्साहवर्धन करने हेतु तिल्दा की पार्षद एवं महिला मोर्चा अध्यक्ष रानी जैन तथा भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता एवं शहरी क्षेत्र उपाध्यक्ष सौरभ जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बचपन का समय जीवनभर के लिए सबसे यादगार समय होता है। इस उम्र में जो भी सीख मिलती है, वह जीवनभर काम आती है। बच्चों की सीखने की क्षमता इस अवस्था में अत्यंत उच्च होती है, इसलिए यदि वे अभी से सही दिशा में मेहनत करें तो जीवन में बहुत ऊँचा मुकाम प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने बच्चों द्वारा कम समय में बिना किसी विशेष अभ्यास के इतने सुंदर और संदेशपूर्ण नाटकों की प्रस्तुति की भरपूर सराहना की। नाटकों में प्रस्तुत हास्य और व्यंग्य के दृश्य भी सभी को अत्यंत पसंद आए। उन्होंने सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

सौरभ जैन ने इस विशेष आयोजन का हिस्सा बनकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया तथा इस प्रकार के अनूठे समर कैंप के आयोजन के लिए संस्था का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविर बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अध्यात्म और अपने संस्कारों एवं संस्कृति से जोड़े रखने का श्रेष्ठ माध्यम हैं। आज बच्चों को सही सोचने की कला बहुत कम सिखाई जाती है, लेकिन यदि बचपन से ही सकारात्मक सोच की समझ विकसित हो जाए तो भविष्य का समाज निश्चित रूप से श्रेष्ठ बनेगा।

उन्होंने बच्चों की भी सराहना की कि वे टीवी और मोबाइल छोड़कर इस शिविर में भाग लेने आ रहे हैं। अंत में उन्होंने नाटक प्रस्तुत करने वाले सभी बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें विशेष पेन एवं कलरिंग सेट भेंट किए।

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