निलंबन पर बवाल: स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने विभागीय कार्रवाई पर उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

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कांकेर। कांकेर जिले में स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी के निलंबन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक के खिलाफ की गई निलंबन कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने प्रेस वार्ता कर कार्रवाई को एकतरफा और नियमों के विपरीत बताते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही अधिकारियों पर कर्मचारियों के साथ मनमानी और दुर्व्यवहार करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

मामला आयुष्मान आरोग्य मंदिर कुरीस्टीकुर में पदस्थ ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक खगेन्द्र कुमार सोनकर से जुड़ा है, जो स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संगठन के जिला उपाध्यक्ष भी हैं। संगठन का कहना है कि वर्ष 2013 से उप स्वास्थ्य केंद्र कुरीस्टीकुर में पदस्थ खगेन्द्र सोनकर ने विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उनके कार्यकाल के दौरान कभी भी कार्य में लापरवाही को लेकर कोई गंभीर शिकायत सामने नहीं आई।

प्रेस वार्ता के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि इतने लंबे सेवाकाल में कर्मचारी को न तो कोई लिखित नोटिस दिया गया और न ही व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन अचानक निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। संगठन ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग की है।

संगठन ने बीएमओ धनेलीकंहार की शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2024-25 के एक पुराने मामले को आधार बनाकर वर्तमान निलंबन आदेश जारी किया गया है, जबकि संबंधित कर्मचारी द्वारा उस समय मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब समय पर प्रस्तुत किया जा चुका था। संगठन का दावा है कि स्पष्टीकरण जमा करने का प्रमाण भी उनके पास उपलब्ध है।

कर्मचारी संगठन का आरोप है कि यदि विभाग को कर्मचारी का जवाब संतोषजनक नहीं लगा था तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई उसी समय की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अब पुराने प्रकरण को नए सिरे से प्रस्तुत कर निलंबन को उचित ठहराने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रेस वार्ता में संगठन के जिलाध्यक्ष रामेश्वर कुमार साहू ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के बजाय कुछ अधिकारी दबाव की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा है, जिससे विभागीय कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निलंबन आदेश की समीक्षा करने तथा संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि न्यायसंगत कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आगे आंदोलन की रणनीति भी बना सकता है।

फिलहाल इस मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों में नाराजगी का माहौल बना हुआ है। अब देखना होगा कि विभाग इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और कर्मचारी संगठन की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।

बाइट: रामेश्वर कुमार साहू, जिलाध्यक्ष, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ।

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