कांकेर में भीम आर्मी की जनहित एवं जनअधिकार रैली सफलतापूर्वक संपन्न
भीम आर्मी भारत एकता मिशन, जिला कांकेर के तत्वावधान में आयोजित जनहित एवं जनअधिकार रैली आज सफलतापूर्वक संपन्न हुई। रैली में जिले सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने भाग लेकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
बताया गया कि भीम आर्मी का कार्यक्रम नए बस स्टैंड में सभा के साथ प्रारंभ हुआ। सभा के पश्चात रैली निकालते हुए कोमलदेव अस्पताल चौक से मुड़कर कलेक्टर मार्ग पहुँची, जहाँ भीम आर्मी की रैली को बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। परंतु अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग करते हुए कार्यकर्ता बैरिकेड हटाने की मांग पर अड़ गए। मजबूरन प्रशासन को बैरिकेड खोलना पड़ा। इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि किसी रैली को बैरिकेड लगाकर रोका नहीं गया, बल्कि भीम आर्मी भारत एकता मिशन की रैली के लिए बैरिकेड खोलकर आगे बढ़ने दिया गया। रैली बाबा साहब की प्रतिमा स्थल तक पहुँची, जहाँ श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित किए गए।
इसके पश्चात भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने कहा कि भीम आर्मी संविधान के सिद्धांतों पर चलने वाला संगठन है। भीम आर्मी का मुख्य उद्देश्य देश में समानता स्थापित करना तथा जातिवाद और भेदभाव को समाप्त करना है। उनका कहना था कि आदिवासियों के साथ सदियों से जातिगत भेदभाव होता आया है। आदिवासियों को कभी भी स्वयं को बड़ी जाति कहने वाले लोगों द्वारा समान अधिकार नहीं दिए गए तथा शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूल अधिकारों से भी वंचित रखा गया। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान के माध्यम से सभी नागरिकों को समानता और बराबरी का अधिकार प्रदान किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, आरएसएस और बजरंग दल जैसे संगठन एवं दल लोगों के बीच नफरत फैलाने का कार्य कर रहे हैं। एक धर्म को दूसरे धर्म से, एक जाति को दूसरी जाति से, भाई को भाई से तथा मित्र को मित्र से लड़ाकर “फूट डालो और शासन करो” की नीति अपनाई जा रही है। उनका कहना था कि इस प्रकार लोगों को आपस में लड़ाकर आदिवासियों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को दिए गए अधिकारों की रक्षा के लिए भीम आर्मी सदैव संघर्ष करती रहेगी।
इसी क्रम में विभिन्न जनहित एवं जनाधिकार संबंधी समस्याओं को उठाते हुए निम्न मांगें रखी गईं—
1. धार्मिक एवं जातिगत भेदभाव पर रोक :
जिले के आदिवासी क्षेत्रों में धर्म एवं जाति के आधार पर भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार तथा आपसी विवाद फैलाने की घटनाओं को तत्काल रोका जाए। भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, स्वतंत्रता एवं गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकारों का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा गांवों में शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने हेतु प्रभावी कदम उठाए जाएं।
2. पेयजल, आवास एवं कृषि कार्यों में भेदभाव पर कार्यवाही :
किसी भी व्यक्ति को कुएं, हैंडपंप, नल-जल योजना अथवा अन्य सार्वजनिक जलस्रोतों से पानी लेने से रोकने, घरों में पानी भरने से रोकने तथा खेती-बाड़ी के कार्यों में बाधा पहुंचाने जैसी असंवैधानिक गतिविधियों को तत्काल रोका जाए। दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत एवं कठोर कार्यवाही की जाए।
3. भेदभाव और दंगे फैलाने वाली बैठकों पर रोक :
जाति, धर्म या समुदाय के आधार पर भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार अथवा दंगे फैलाने के उद्देश्य से आयोजित बैठकों एवं गतिविधियों पर निगरानी रखी जाए तथा कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाए।
4. स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता :
जिले में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं ताकि युवाओं का अन्य राज्यों में पलायन कम हो। जिले में संचालित खदानों, उद्योगों एवं अन्य परियोजनाओं में बाहरी प्रदेशों के मजदूरों की अपेक्षा स्थानीय योग्य युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
5. किसानों के लिए खाद-बीज की पर्याप्त व्यवस्था :
किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तायुक्त खाद, बीज एवं कृषि संबंधी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए ताकि खेती कार्य प्रभावित न हो। निजी दुकानों में अवैध रूप से अधिक मूल्य पर खाद विक्रय करने वाले दुकान संचालकों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए।
6. आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा :
आदिवासी बहुल गांवों के सभी विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक, आवश्यक शैक्षणिक संसाधन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को सामान्य अंग्रेजी बोलना और लिखना सिखाया जाए।
7. स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार :
जिले के सभी शासकीय अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयों, चिकित्सकों, जांच उपकरणों एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर से दवाइयां खरीदने अथवा निजी लैब में महंगे परीक्षण कराने के लिए मजबूर किए जाने पर रोक लगाई जाए तथा निजी लैबों में जांच के नाम पर होने वाली लूट को रोका जाए।
8. स्कूलों में धर्म विशेष के प्रार्थना मंत्र संबंधी आदेश निरस्त किया जाए :
अतिरिक्त मंत्रों का बोझ डालना शिक्षा के मूल उद्देश्य से ध्यान भटकाने वाला कदम प्रतीत होता है। बच्चों का अधिकतम समय पढ़ाई, विज्ञान, गणित, हिंदी, अंग्रेजी, तकनीकी शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकास पर केंद्रित होना चाहिए। धर्मनिरपेक्ष देश में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि को बच्चों पर जबरन थोपना उचित नहीं है।
रैली के माध्यम से धार्मिक एवं जातिगत भेदभाव पर रोक लगाने, पेयजल, आवास एवं कृषि कार्यों में भेदभाव करने वालों पर कार्यवाही करने, संविधान विरोधी एवं दंगा फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने, किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद, बीज एवं डीजल उपलब्ध कराने तथा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग उठाई गई।
साथ ही आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता तथा संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
रैली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। रैली के पश्चात प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जनहित से जुड़े मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई।
भीम आर्मी भारत एकता मिशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि जनहित एवं जनाधिकार से जुड़े मुद्दों का निराकरण नहीं किया गया तो भविष्य में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
इस अवसर पर भीम आर्मी भारत एकता मिशन के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद जी, प्रदेश उपाध्यक्ष सुयाल नाग जी, जिला अध्यक्ष राजमन सलाम जी, जिला उपाध्यक्ष पंकज कुंजम जी, जिला उपाध्यक्ष पूनमचंद ताराम जी, जिला महासचिव विकेश सर्फे जी, जिला सचिव गोपाल यादव जी, जिला युवा अध्यक्ष कमल सलाम जी, छात्र जिला अध्यक्ष देवेंद्र यादव जी, मीडिया प्रभारी कृष्ण कोर्राम जी, मीडिया प्रभारी वीरेंद्र पटेल जी सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जय भीम | जय संविधान | जय भारत

0 Comments
Post a Comment