तिल्दा-नेवरा में दोहरी कार्रवाई का आरोप: गरीबों पर सख्ती, रसूखदारों पर मेहरबानी

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*गोवर्धन यदु* 
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*आखिर इन अतिक्रमणकारियों को किन का संरक्षण प्राप्त है पूछता है तिल्दा नेवरा*
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तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां एक ओर गरीब परिवारों के दुकानों पर बुलडोज़र चलाकर उनकी रोजी-रोटी छीन ली गई , वहीं दूसरी ओर पैसे वाले और रसूखदार लोगों के नाली पर बने अवैध दुकानों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार, कुछ महीने पहले  नगर प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर कई गरीब दुकानदरों पर कार्यवाही किया  गया। इन दुकानदारो का कहना  था  कि बिना पर्याप्त नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था के उनके दुकानों को उजाड़ दिए गए, जिससे वे खुले आसमान के नीचे अपना धंधा करने  को मजबूर  हैं।

वहीं, दूसरी तरफ नाले के ऊपर और किनारे बने कई पक्के दुकान आज भी जस के तस खड़े हैं या निर्माण हो रहे है । खास तौर पर दीनदयाल चौक पर नाले के ऊपर प्रतित होती  एक कपड़े की दुकान और भैरवगढ़ धाम के आगे स्थित एक एजेंसी की दुकान को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जो नाले के ऊपर बना हुआ प्रतित हो  रहा है जो अब तक नहीं हटाई गई हैं।

*नगर में चर्चा का विषय है कि इन दोनों दुकानों के लिए लाखों रुपए का सौदा किया गया है लेकिन हमारे द्वारा इस लेनदेन की कोई पुष्टि नहीं की जाती है*

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन दुकानों के मालिक प्रभावशाली और पैसे वाले लोग हैं, जिन पर प्रशासन हाथ डालने से बच रहा है। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर पक्षपात और भेदभाव के आरोप लग रहे हैं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर अतिक्रमण हटाना ही उद्देश्य होता  तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए थी । केवल गरीबों को निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है।

 *हमारे समाचार का यह कदाचित उद्देश्य नहीं है नाले पर अतिक्रमण को बढ़ावा देने या पक्ष लेने का  लेकिन कार्यवाही सब पर समान रूप से होनी चाहिए क्योंकि न्याय सबके लिए समान होता है चाहे वह गरीब हो या अमीर  यह अलग बात है कि तिल्दा नेवरा में न्याय सिर्फ चंद पूंजीपतियों के हाथ की कठपुतली बनकर रह गई है* 

इस पूरे मामले में नगर पालिका के  अधिकारि का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया था। उनका कहना था कि अतिक्रमण हुआ है तो बिल्कुल उस पर संज्ञान लेते हुए नोटिस दिया जाएगा और कार्यवाही भी किया जाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इन  पर क्या कदम उठाता है और क्या सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई होती है या नहीं।

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