दूध नदी स्वच्छता अभियान जारी, कम उपस्थिति के बावजूद श्रमवीरों ने निकाला कई ट्रॉली कचरा

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कांकेर। शहर की जीवन रेखा मानी जाने वाली मातृ स्वरूपा दूध नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए चलाया जा रहा स्वच्छता अभियान शनिवार को भी जारी रहा। श्रमवीरों की अपेक्षाकृत कम उपस्थिति के बावजूद अभियान निर्धारित समय तक चला और नदी के तल एवं तट से कई ट्रॉली कचरा निकालकर उसका मौके पर ही निष्पादन किया गया।
अभियान का नेतृत्व कर रहे जन सहयोग संस्था के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी ने बताया कि नगर पालिका की कचरा वाहनों की उपलब्धता नहीं होने के कारण एकत्रित कचरे का निस्तारण स्थल पर ही करना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि रविवार को अधिक संख्या में नागरिक, पुलिस प्रशासन तथा विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी-कर्मचारी अभियान में शामिल होकर सहयोग करेंगे।

अजय पप्पू मोटवानी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आसपास के रहवासी और दुकानदार लगातार अपील के बावजूद नदी में कचरा डालना बंद नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मात्र एक सप्ताह के भीतर नदी में फिर से बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो गया है, जो स्वच्छता प्रयासों के लिए चुनौती बन रहा है।

उन्होंने कहा कि दूध नदी केवल जिले की जीवन रेखा ही नहीं है, बल्कि इसके किनारे रहने और व्यापार करने वाले लोगों के जीवन पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। यदि स्थानीय नागरिक ही जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे तो नदी को स्वच्छ बनाए रखना कठिन होगा। उन्होंने ऐसे लोगों पर कार्रवाई की आवश्यकता बताते हुए कहा कि नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की है।

शनिवार को आयोजित श्रमदान कार्यक्रम में जन सहयोग संस्था के सदस्यों के साथ अखिल भारतीय भूतपूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्यों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अभियान में अजय पप्पू मोटवानी, धर्मेंद्र देव, भूतपूर्व सैनिक टी.के. जैन, सूबेदार अरविंद यादव, प्रवीण गुप्ता, राजेश चौहान, शैलेंद्र देहारी, डॉ. श्याम देव, आशुतोष देव, सागर देव, दीपक देहारी और जितेंद्र प्रताप देव सहित कई समाजसेवियों एवं युवाओं ने श्रमदान कर नदी स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

स्थानीय लोगों ने श्रमवीरों के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। अभियान का उद्देश्य दूध नदी को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त बनाना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सके।

"दूध नदी को स्वच्छ बनाने जुटे श्रमवीर, कम उपस्थिति के बावजूद जारी रहा सफाई अभियान"

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