पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल: सट्टे के फर्जी केस में फंसाने और ₹36 हजार रिश्वत मांगने का आरोप

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चरामा पुलिस व विवेचक के खिलाफ एसपी से शिकायत, 6 महीने से जब्त आईफोन की जांच रिपोर्ट लंबित

कांकेर। जिले के चरामा थाना क्षेत्र के बंगलापारा (वार्ड क्रमांक-13) निवासी मुकेश साहू ने चरामा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें सट्टे के एक फर्जी मामले में फंसाया गया तथा केस से संबंधित कार्रवाई और जब्त मोबाइल लौटाने के एवज में कुल ₹36 हजार की अवैध मांग की गई।
मुकेश साहू ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर मीडिया को बताया कि करीब छह महीने पहले चरामा पुलिस ने उन पर सट्टा खेलने का मामला दर्ज किया था। उनका दावा है कि मामला पूरी तरह झूठा है। केस दर्ज करते समय पुलिस ने उनका आईफोन जब्त कर लिया, जो आज तक वापस नहीं किया गया है।

पासवर्ड देने के बाद भी नहीं पूरी हुई जांच

पीड़ित का कहना है कि उन्होंने जांच में सहयोग करते हुए मोबाइल का पासवर्ड भी पुलिस को उपलब्ध करा दिया था, लेकिन इसके बावजूद छह महीने बीत जाने के बाद भी न तो मोबाइल लौटाया गया और न ही जांच रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की गई। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगने पर पुलिस ने केवल इतना जवाब दिया कि मोबाइल जांच के लिए भेजा गया है, जबकि अब तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।

विवेचक पर रिश्वत मांगने का आरोप

मुकेश साहू ने मामले के विवेचक टीकम सोने पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मोबाइल वापस करने और केस से संबंधित दस्तावेज हटाने के लिए उनसे ₹25 हजार की रिश्वत मांगी गई। पैसे देने से इनकार करने पर जांच रिपोर्ट पेन ड्राइव में लाने के नाम पर 256 जीबी की चार पेन ड्राइव या फिर ₹11 हजार अतिरिक्त देने की मांग की गई।

एसपी और एसडीओपी से की शिकायत

पीड़ित ने बताया कि पूरे मामले की शिकायत उन्होंने पुलिस अधीक्षक को मौखिक एवं लिखित रूप से दो बार की है। साथ ही एसडीओपी कार्यालय में भी आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और वे चाहते हैं कि पुलिस जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

हालांकि, इस संबंध में चरामा पुलिस या विवेचक पक्ष का बयान प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

(नोट: यह समाचार आवेदक द्वारा दायर प्रथम अपील में किए गए दावों पर आधारित है। संबंधित पुलिस विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)**

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