कांकेर में मादा भालू का कहर दो सगे भाई-बहन की मौत, तीसरी बहन गंभीर

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गौरव शोरी नरहरपुर। कांकेर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर नरहरपुर वन परिक्षेत्र के लारगांव-मरकाटोला गांव में बुधवार सुबह मादा भालू ने हमला कर एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहनों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस दर्दनाक घटना में दो सगे भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी एक अन्य बहन की हालत गंभीर बनी हुई है। घायल महिला को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए अस्पताल रेफर किया गया है।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत और तीसरी बहन के गंभीर रूप से घायल होने से मरकाटोला गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरकाटोला निवासी हलाल खोर जुर्री सुबह अपने खेत के पास मौजूद था। इसी दौरान मादा भालू ने अचानक उस पर हमला कर दिया। उसकी चीख-पुकार सुनकर उसकी सगी बहन चमारोन बाई, जो स्थानीय स्कूल में रसोइया के रूप में कार्यरत थी और स्कूल से लौट रही थी, भाई को बचाने के लिए मौके पर पहुंची। लेकिन मादा भालू ने उस पर भी ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में दोनों भाई-बहन की मौत हो गई।

दोनों की आवाज सुनकर खेत में काम कर रही उनकी एक अन्य बहन खोरीन बाई भी मौके पर पहुंची। वह अपने भाई और बहन को बचाने का प्रयास कर पाती, उससे पहले ही मादा भालू ने उस पर भी हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने घटना की सूचना गांव तक पहुंचाई, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। घटना की जानकारी तत्काल वन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन को दी गई।

वन विभाग और ग्रामीणों की मदद से गंभीर रूप से घायल महिला को किसी तरह भालू के पास से बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।

ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार शाम मादा भालू के एक शावक की मौत हो गई थी। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम शावक के शव को अपने कब्जे में लेकर चली गई थी। बताया जा रहा है कि शावक के अपने पास नहीं होने के कारण मादा भालू आक्रामक हो गई और उसने आसपास के ग्रामीणों पर हमला कर दिया। हालांकि, मादा भालू के आक्रामक होने के वास्तविक कारणों की वन विभाग द्वारा आधिकारिक पुष्टि किया जाना बाकी है।

ग्रामीणों ने बताया कि मादा भालू अपने मृत शावक के साथ स्कूल के पीछे के क्षेत्र में देखी गई थी। यह इलाका स्कूल परिसर से सटा हुआ है। स्कूल की चारदीवारी नहीं होने के कारण जंगली जानवरों की आवाजाही से हमेशा खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार, बीते दिनों इस क्षेत्र में तेंदुए की भी मौजूदगी देखी गई थी।

हमले के बाद मादा भालू दोनों मृतकों के शवों के पास डटी रही और किसी को नजदीक नहीं आने दे रही थी। शवों को बाहर निकालने पहुंचे वन विभाग, पुलिस और ग्रामीणों को भालू ने कई बार दौड़ाया। मादा भालू के आक्रामक व्यवहार के कारण दोनों शवों को उठाने में रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय विधायक आशाराम नेताम भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार तथा ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

करीब चार घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद रायपुर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने मादा भालू को ट्रैंकुलाइज गन की मदद से बेहोश कर काबू में किया। इसके बाद वन विभाग की टीम मादा भालू को मौके से बाहर निकालने लगी।

इस दौरान घटना से आक्रोशित कुछ ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर बेहोश मादा भालू की ओर बढ़ गए और उस पर हमला करने का प्रयास किया। पुलिस और वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत कर ग्रामीणों को रोका और स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद मादा भालू को सुरक्षित रूप से पिंजरे में कैद किया गया।

मादा भालू के काबू में आने के बाद ही दोनों मृतक भाई-बहन के शवों को मौके से उठाया जा सका। शवों को पोस्टमार्टम और अन्य वैधानिक कार्रवाई के लिए भेजा गया है।

रेस्क्यू के बाद मादा भालू को फिलहाल कांकेर लाया गया है, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। वन विभाग की टीम उसके व्यवहार और स्वास्थ्य की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

बताया गया है कि पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वन विभाग और स्थानीय विधायक की ओर से आश्वासन दिया गया है कि आवश्यक दस्तावेजी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेष राहत राशि भी पीड़ित परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी।

गांव में मातम, ग्रामीणों में आक्रोश

एक ही परिवार के दो सगे भाई-बहन की मौत और तीसरी बहन के गंभीर रूप से घायल होने से पूरे मरकाटोला गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार भालू और तेंदुए की आवाजाही से लोग भय के साये में जी रहे हैं।

ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जंगली जानवरों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी, गांव और स्कूल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

फिलहाल वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीम घटना की जांच में जुटी हुई है। घायल महिला का उपचार जारी है तथा मामले से जुड़ी अन्य जानकारी की आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।

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