विभिन्न मांगों को लेकर चक्का जाम करने वाले ग्रामीण कल सुबह से प्रदर्शन कर रहे, पुरी रात ग्रामीण कच्चे जाने वाले रास्ते पर रोड़ जाम कर बैठे हुए ,प्रशासन नजर बनाए हुए हैं

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TOP NEWS छत्तीसगढ़ भानुप्रतापपुर से संतोष बाजपेयी की रिपोर्ट
*भानुप्रतापपुर*
विभिन्न मांगों को लेकर चक्का जाम करने वाले ग्रामीण सुबह साढ़े ग्यारह बजे से प्रदर्शन कर रहे हैं। और वे कच्चे माइंस की ओर आगे बढ़ रहे थे किन्तु पुलिस ने फिर रोक दिया है। अब ग्रामीण सड़क पर फिर अलावा जलाकर खाना बनाने में लगे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण भी एकत्रित होकर एक जगह पर रुके हुए हैं।
अधिकारी आकर उनसे बात करें। हालांकि प्रशासन की ओर से चक्का जाम स्थल पर एसडीएम और एडिशनल एसपी तथा तहसीलदार भी मौजूद रहे। लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उच्च अधिकारी उनसे चर्चा करें। देर शाम तक उनका प्रदर्शन जारी रहा इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई थी। प्राइवेट वाहन के यात्रियों को भी परेशानी हुई। हालांकि प्रशासन ने पहले से ही चक्का जाम की सूचना होने पर रूट डायवर्ट कर दिया था इसलिए बस और अन्य सवारी वाहन अन्य रास्ते से होकर अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच गए।।
उनका आरोप है माइंस का प्रभावित एरिया 15 किलोमीटर तक का है ऐसे में आसपास के कई ग्राम प्रभावित क्षेत्र में आते हैं जिनमें से मजदूरों की भर्ती होनी चाहिए लेकिन माइंस प्रबंधन बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने में कोई कारगर कदम नहीं उठा रही है। उनका आरोप है कि माइंस प्रबंधन ने जनसुनवाई के पहले ही 5000 पेड़ कटवा दिए। क्षेत्र में जिस तरह से विकास होना चाहिए वह विकास कार्य नहीं हो रहा है। उनकी मांग है कि कच्चे में होने वाले जनसुनवाई को ब्लॉक मुख्यालय में किया जाए।
आदिवासी नेता कोमल हुपेंडी ने आरोप लगाया कि गोदावरी माइंस प्रबंधन द्वारा निजी भमि भूमि स्वामी एवं वन भूमि के हितग्राहियों  की जमीन को लीज पर लिया है जो पूर्णता गलत है उन्होंने कहा माइंस शुरू होने के पहले ही 5000 पेड़ काट दिए।
आदिवासी समुदाय का शोषण कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से कंपनी की मनमानी पर रोक लगाने और प्रभावित ग्रामीणों की मांगें पूरी करने की अपील की।
चंद्रमौली मिश्रा शिवसेना नेता ने आरोप लगाया है कि कंपनी द्वारा चिन्हअंकित गांव पर ही थोड़ा-थोड़ा विकास कर क्षेत्र के ग्रामीणों को ठगने का काम कर रही है। जबकि कंपनी को प्रभावित क्षेत्र के सभी गांव में विकास करना है जिसमें उनका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य शिक्षा पयजल सड़क विद्युत समेत मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी है। उन्होंने कहा क्षेत्र के ग्रामीणों को मजदूरी पर नहीं रखा जा रहा है मजदूरों के अलावा कई अन्य टेक्निकल मैकेनिक भी बाहर से बलाए गए।
जनपद पंचायत अध्यक्ष सुनाराम तेता ने कहा कि कंपनी द्वारा CSR  और DMF की राशि का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों के विकास में नहीं किया गया है। उनका कहना है कि CSR और DMF राशि से कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। आज भी प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा पेयजल की कमी है विकास के नाम पर सिर्फ जीरो है।
आम आदमी पार्टी के नेता हरेश चक्रधारी ने कहा प्रशासन से हम मांग करते हैं कि 15 किलोमीटर तक के एरिया में कौन-कौन सा गांव प्रभावित आता है इसे बता दें। उन्होंने कहा कंपनी लोगों को आपस में लड़ाने का काम कर रहा है, जिसके कारण महत्त्वपूर्ण जनसुनवाई को भानुप्रतापपुर से हटाकर कच्चे जैसे दूरस्थ स्थान पर कराया जा रहा है। उन्होंने कहा गोदावरी कंपनी द्वारा जनसुनवाई के पहले ही 5000 पेड़ काट दिए जिस पर शासन प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं है कर रहा जबकि कोई किसान या हमारे आदिवासी भाई के घर एक नग अवैध लकड़ी या एक दो पेड़ काट दिया जाता।
आदिवासी नेता संजू नेताम ने आरी डोंगरी माइंस पर आरोप लगाया कि ये खनन कंपनियां स्थानीय आदिवासी समुदायों को लूटने का काम कर रही हैं, जिससे युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है।

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