“इंसानियत ज़िंदा है” — समाज सेवकों ने शीतलहर की रात में बचाई एक असहाय ज़िंदगी

0


काँकेर। इस स्वार्थ भरी दुनिया में आज भी इंसानियत ज़िंदा है—यह बात एक बार फिर क्षेत्र के समाज सेवकों ने साबित कर दी। प्रदेश की सुविख्यात समाजसेवी संस्था “जन सहयोग” के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी के नेतृत्व में शीतलहर की एक भयावह रात में ऐसा मानवीय कार्य किया गया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।


घटना उस समय की है जब रात्रि में नेशनल हाईवे स्थित ग्राम लखनपुरी से विजय नत्थानी ने दूरभाष पर सूचना दी कि सड़क किनारे एक विकलांग व्यक्ति अत्यंत दयनीय अवस्था में तड़प रहा है और यदि तत्काल सहायता न मिली तो शीतलहर में उसकी मृत्यु निश्चित है। सूचना मिलते ही जन सहयोग के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी ने पुलिस पेट्रोलिंग टीम को सूचित कर मौके के लिए रवाना हुए।



इसी दौरान कांकेर की डिप्टी कलेक्टर के माध्यम से नगरी के समाजसेवक सनी छाजेड़ से भी संपर्क हुआ, जिन्होंने अपने साथियों के साथ सहायता हेतु पहुंचने की बात कही।


मौके पर पहुंचने पर यह सामने आया कि पीड़ित व्यक्ति हिंदी नहीं जानता और मानसिक असंतुलन के कारण किसी से सहायता लेने से भयभीत था। भाषा की बाधा के कारण काफी समय तक संवाद नहीं हो सका। इसी बीच दैवीय संयोग से आंध्र प्रदेश नंबर की एक गाड़ी रोकी गई, जिसे चला रहे थे नंदू भाटिया, निवासी जिला कोरापुट (उड़ीसा)। वे तेलुगु भाषा जानते थे और घायल व्यक्ति से संवाद स्थापित कर पाए।


तेलुगु में बातचीत से पता चला कि पीड़ित का नाम के. अशोक है, जो करीमनगर (हैदराबाद, तेलंगाना) का निवासी है। वह रोजगार की तलाश में छत्तीसगढ़ आया था, लेकिन नौकरी मिलने से पहले ही दुर्घटना में उसका पैर टूट गया। इस हादसे के सदमे से वह मानसिक रूप से भी असंतुलित हो गया और लोगों से डरने लगा।



जब ट्रक चालक नंदू ने उसे उसकी ही भाषा में समझाया कि ये सभी लोग समाजसेवक हैं और उसका इलाज कराकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाएंगे, तब अशोक का आत्मविश्वास लौटा और वह इलाज के लिए तैयार हो गया।


रात्रि भर के अथक प्रयासों के बाद सवेरे तक पीड़ित को “अपना घर आश्रम”, मंदिर हसौद, बोरी गांव (रायपुर) स्थित सुविधा युक्त केंद्र में सुरक्षित पहुंचाया गया। इस दौरान कांकेर की डिप्टी कलेक्टर ने भी पूरा सहयोग प्रदान किया।


इस पुनीत कार्य में पुलिस पेट्रोलिंग टीम के अंकालू ध्रुव, जितेंद्र उइके, सनत विश्वकर्मा (चालक), दयालु ट्रक चालक नंदू भाटिया, नगरी के समाजसेवक सनी छाजेड़, सत्यम भट्ट, तीरथ राज, खेमराज साहू, शिवा प्रधान, अपना घर आश्रम के अध्यक्ष श्री कोपल जी सुल्तानिया, तथा जन सहयोग से जुड़े करण नेताम, अमृत जवरानी, सुनील आहूजा सहित अनेक समाजसेवकों का सराहनीय योगदान रहा।


यदि यह समन्वित प्रयास और मानवीय संवेदना न होती, तो शीतलहर की उस रात में पीड़ित व्यक्ति का बच पाना अत्यंत कठिन था। इस मानवता-पूर्ण कार्य के लिए क्षेत्रभर में समाजसेवकों और प्रशासन की भूरी-भूरी प्रशंसा की जा रही है।

Share this article

Show comments
Hide comments

0 Comments

Post a Comment