दुर्गुकोंदल क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन पर नहीं लग रहा लगाम“दस्तावेज पूरे हैं” का दावा, फिर रात के अंधेरे में क्यों चलता है, कारोबार?

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*TOP NEWS छत्तीसगढ़ भानुप्रतापपुर से संतोष बाजपेयी की रिपोर्ट*

*भानुप्रतापपुर*

भानुप्रतापपुर विधानसभा अंतर्गत दुर्गुकोंदल क्षेत्र में रेत का अवैध खनन और परिवहन खुलेआम जोरों पर जारी है। हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायतों और खबरों के बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। जहां-जहां रेत का खनन और परिवहन हो रहा है, वहां जुड़े लोगों का एक ही जवाब सामने आता है *“रॉयल्टी है, सारे दस्तावेज पूरे हैं।”*

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर सच में सभी दस्तावेज पूर्ण हैं, तो फिर रेत का खनन और परिवहन रात के अंधेरे में ही क्यों किया जा रहा है?

*हाईवे पर नियमों की उड़ती धज्जियां*

दुर्गुकोंदल क्षेत्र से गुजरने वाले मार्गों पर रेत से भरी गाड़ियाँ दिन-रात दौड़ती नजर आ रही हैं। इन वाहनों में क्षमता से कहीं अधिक रेत भरी जाती है। हालत यह है कि गाड़ियों से रेत सड़क पर गिरती रहती है, जिससे फिसलन बढ़ रही है और आए दिन हादसों को खुला न्योता मिल रहा है।

*एक साथ इतनी खदानें, सभी वैध?*

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही क्षेत्र में एक साथ कई खदानें सक्रिय हैं और दावा किया जा रहा है कि सभी के दस्तावेज पूर्ण हैं।

यह सवाल प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

क्या यह अचानक हुआ कोई चमत्कार है या फिर *रेट के बदले रेत* की कोई अनकही व्यवस्था?

*प्रशासनिक और माइनिंग विभाग पर सवाल*

जब भी जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है, कभी फोन नहीं उठता तो कभी आश्वासन देकर बात टाल दी जाती है। माइनिंग विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना रही है। यदि सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है, तो फिर खुली जांच से परहेज क्यों?

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