तिल्दा तहसील में कोटवारों का हल्ला बोल: नियमितीकरण की मांग पर एक दिवसीय धरना, बोले- अंग्रेजों के जमाने से सेवा, फिर भी पेंशन नहीं**तहसील कार्यालय पर गरजे कोटवार: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी दर्जा नहीं, नाममात्र के वेतन में परिवार पालना मुश्किल

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 गोवर्धन यदु
तिल्दा-नेवरा  छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर जिले के तिल्दा  तहसील मुख्यालय में मंगलवार को कोटवारों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। कोटवार संघ के प्रांतीय आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में विकासखंड के हर गांव से आए सैकड़ों कोटवारों ने हिस्सा लिया और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर अपनी आवाज बुलंद की। 

कोटवार संघ के  अध्यक्ष धरमे एवं  भुषण दास मानिकपुरी ने प्रेस वार्ता में बताया कि कोटवार पिछले कई वर्षों से अपनी ज्वलंत समस्याओं के निराकरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट ने विभिन्न विभागों में 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ और विशेषकर रायपुर जिले के तिल्दा तहसील  के कोटवारों को आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। 

संघ ने वर्तमान में मिल रहे पारिश्रमिक को इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में बेहद कम और अनुचित बताया। अध्यक्ष ने कहा कि सेवा भूमि के आधार पर कोटवारों को ए, बी, सी, डी जैसी श्रेणियों में बांटकर मासिक भुगतान किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने सभी कोटवारों के लिए सम्मानजनक और एकसमान वेतनमान की मांग की। 

कोटवारों का कहना है कि वे अंग्रेजों के शासनकाल से पीढ़ी-दर-पीढ़ी शासन-प्रशासन और आम जनता की सेवा करते आ रहे हैं। गांव की सुरक्षा, सरकारी दस्तावेज पहुंचाना, पंचनामा कराना जैसे दर्जनों काम कोटवारों के भरोसे होते हैं। इतनी लंबी सेवा के बाद भी मृत्यु, त्यागपत्र या सेवानिवृत्ति की स्थिति में उन्हें पेंशन या ग्रेच्युटी जैसी किसी भी शासकीय योजना का लाभ नहीं मिलता। नियमितीकरण न होने के कारण कोटवारों को नाममात्र के पैसे में गुजारा करना पड़ रहा है, जिससे वे और उनके परिवार गहरे मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। 

कोटवार संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने उनकी मानवीय समस्याओं पर जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं की, तो वे आगे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। धरना प्रदर्शन के बाद कोटवारों ने अपनी मांगों का ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी एवं तहसीलदार को सौंपा।

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