पहली ही बारिश में उखड़ी भारतमाला कॉरिडोर की साइड पिचिंग, खेतों में भरा पानी
*किसानों ने जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने, निष्पक्ष तकनीकी जांच और त्वरित सुधार की उठाई मांग*
कांकेर। भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर की निर्माण गुणवत्ता पर पहली ही बारिश के बाद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांकेर जिले के बासनवाही क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस राष्ट्रीय राजमार्ग के कई हिस्सों में सड़क किनारे की गई साइड पिचिंग क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके चलते मिट्टी का कटाव शुरू हो गया है, वहीं पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी आसपास के किसानों के खेतों में भर रहा है। इससे धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका गहरा गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान ही कार्य की गुणवत्ता को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी का ध्यान आकर्षित कराया गया था, लेकिन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब पहली ही बारिश में साइड पिचिंग उखड़ने और मिट्टी बहने की घटनाओं ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मजबूती पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कई स्थानों पर सड़क किनारों की सुरक्षा भी प्रभावित हुई है, जिससे भविष्य में सड़क की स्थिरता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारतमाला जैसी महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना में निर्माण कार्य पूरी तरह तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप होना चाहिए था। लेकिन शुरुआती बारिश में ही निर्माण संबंधी कमियां सामने आने से कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में सड़क के अन्य हिस्सों को भी गंभीर नुकसान हो सकता है।
क्षेत्र के किसानों के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान प्राकृतिक जल निकासी मार्गों को व्यवस्थित नहीं किया गया। इसके कारण वर्षा का पानी अपने पुराने मार्ग से नहीं निकल पा रहा है और खेतों में जमा हो रहा है। वर्तमान में धान की रोपाई का समय होने से लगातार जलभराव किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो फसल को भारी नुकसान होने के साथ आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ सकती है।
किसानों ने प्रशासन और निर्माण एजेंसी से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कर जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की जाए तथा जहां-जहां साइड पिचिंग क्षतिग्रस्त हुई है, वहां गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराई जाए।
ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय परियोजना में शुरुआती चरण में ही इस प्रकार की खामियां सामने आना गंभीर विषय है। यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही, तकनीकी त्रुटि अथवा गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि जलभराव की समस्या दूर हो सके, सड़क निर्माण की खामियों का स्थायी समाधान हो तथा भविष्य में किसानों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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