भानुप्रतापपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर अब वही सवाल, जिसे हमने पहले ही उठाया था; क्षेत्रवासियों का आक्रोश भी उसी दिशा में

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*TOP NEWS छत्तीसगढ़ जिला उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामीण से संतोष बाजपेयी की रिपोर्ट*

*भानुप्रतापपुर*
भानुप्रतापपुर की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जिस मुद्दे को हमने जच्चा-बच्चा मृत्यु प्रकरण के बाद प्रमुखता से उठाया था, आज वही चिंता क्षेत्रवासियों के ज्ञापन और जनाक्रोश के रूप में सामने आ रही है। उस समय जब कुछ लोग निजी गौतम अस्पताल के डिलीवरी वार्ड और सोनोग्राफी केंद्र को दोबारा शुरू करने के समर्थन में आवाज उठा रहे थे, तब हमने अपने समाचार के माध्यम से यह सवाल उठाया था कि किसी एक निजी अस्पताल पर निर्भर रहने के बजाय भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ही सभी आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित करने की आवश्यकता है।
आज क्षेत्रवासियों ने कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के नाम ज्ञापन सौंपकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में स्वास्थ्य व्यवस्था की न्यायिक जांच, लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई तथा वर्षों से जमे कर्मचारियों के स्थानांतरण की मांग की गई है। साथ ही लगातार सामने आ रही स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं को लेकर स्थायी सुधार की मांग भी की गई है।
दरअसल, जच्चा-बच्चा मृत्यु प्रकरण के बाद जांच में निजी गौतम अस्पताल के प्रसूति वार्ड और सोनोग्राफी केंद्र को सील किया गया था। इसके बाद से क्षेत्र में प्रसव सेवाओं को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी। उस समय भी हमने स्पष्ट कहा था कि सबसे बड़ी जरूरत किसी निजी अस्पताल को बचाने या बंद कराने की बहस नहीं, बल्कि सरकारी अस्पताल को इतना सक्षम बनाने की है कि गरीब और आदिवासी परिवारों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख न करना पड़े।
भानुप्रतापपुर सहित आसपास के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं। निजी अस्पतालों में इलाज, जांच, प्रसव और दवाइयों पर होने वाला खर्च हर परिवार के लिए संभव नहीं है। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही आम जनता की सबसे बड़ी उम्मीद है। यदि वहां विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षित स्टाफ, आधुनिक उपकरण, सोनोग्राफी सुविधा, 24 घंटे प्रसव सेवाएं और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होंगे, तो लोगों को समय पर और सुरक्षित उपचार मिल सकेगा।
आज क्षेत्रवासियों का गुस्सा भी इसी बात को सामने ला रहा है कि केवल बीएमओ या कर्मचारियों का निलंबन कर देने से स्वास्थ्य व्यवस्था की मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। जवाबदेही तय होना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ अस्पतालों में आवश्यक सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टर, पर्याप्त स्टाफ और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
भानुप्रतापपुर जैसे आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्र में गरीब मरीजों के लिए मजबूत सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ही सबसे बड़ा सहारा है। यदि शासन वास्तव में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना चाहता है, तो कार्रवाई के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में भी ठोस और स्थायी कदम उठाने होंगे।

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