भानुप्रतापपुर की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर फूटा आक्रोश, कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन; CHC में एम्बुलेंस के लिए घंटों इंतजार का आरोप
*TOP NEWS छत्तीसगढ़ जिला उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामीण से संतोष बाजपेयी की रिपोर्ट*
*कांकेर ग्रामीण*
भानुप्रतापपुर की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अब क्षेत्रवासियों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सामने आ रही कथित लापरवाही और अव्यवस्थाओं के विरोध में क्षेत्रवासियों ने कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के नाम एसडीएम भानुप्रतापपुर को ज्ञापन सौंपकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
ज्ञापन में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विवादित एवं चर्चित मामलों की निष्पक्ष न्यायिक जांच, लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई तथा लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों के स्थानांतरण की मांग की गई है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से भानुप्रतापपुर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। जच्चा-बच्चा मृत्यु, मलेरिया से मौत, गंभीर मरीजों को समय पर हायर सेंटर रेफर नहीं किए जाने और प्रसव के बाद नवजात की मौत जैसे कई मामलों के बावजूद जिम्मेदारों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
क्या मरीज को इलाज से पहले एम्बुलेंस के लिए भी करना होगा इंतजार?
इसी बीच ग्राम सम्बलपुर निवासी लेखराज सोनी ने भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एसडीएम को शिकायत सौंपी है। शिकायत के अनुसार, 31 जुलाई की रात उनकी पुत्री यामिनी सोनी को खून की कमी की शिकायत के चलते CHC भानुप्रतापपुर लाया गया था। प्राथमिक जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे कांकेर रेफर कर 108 एम्बुलेंस बुलाने की बात कही।
आरोप है कि कई घंटे इंतजार के बावजूद एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। मजबूर होकर परिजनों ने ग्राम के उपसरपंच गौरव चौपड़ा से संपर्क किया, जिसके बाद निजी वाहन की व्यवस्था कर मरीज को कांकेर ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक, कांकेर में समय पर उपचार मिलने के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर किसी गंभीर मरीज को रेफर किया जाता है, तो क्या उसे अस्पताल से बाहर निकलने के बाद एम्बुलेंस के इंतजार में अपनी जिंदगी दांव पर लगानी पड़ेगी? सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में 108 जैसी आपातकालीन सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं होने के आरोप निश्चित तौर पर व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों के कार्यों की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार उनका स्थानांतरण किया जाए, ताकि भानुप्रतापपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
अब देखना यह होगा कि लगातार उठ रहे सवालों और शिकायतों के बाद प्रशासन सिर्फ जांच का आश्वासन देता है या वास्तव में स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करते हुए धरातल पर ठोस कार्रवाई भी करता है।

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